65.68 लाख के लेनदेन विवाद में एग्रोकेम कंपनी के तीन लोगों पर केस
डिस्ट्रीब्यूटरशिप के नाम पर लेनदेन का आरोप, माल, गोदाम किराया और कमीशन की रकम नहीं लौटाने की शिकायत; नेवई पुलिस ने धोखाधड़ी और न्यासभंग का मामला दर्ज किया

भिलाई। नेवई थाना क्षेत्र में एग्रोकेम कंपनी और उसके डिस्ट्रीब्यूटर के बीच करीब 65 लाख 68 हजार 423 रुपए के लेनदेन को लेकर विवाद सामने आया है। शिकायत के आधार पर पुलिस ने कंपनी से जुड़े तीन लोगों मिथलेश शर्मा, रामानुज शर्मा और विष्णु प्रसाद धीवर के खिलाफ धोखाधड़ी, आपराधिक न्यासभंग और अन्य संबंधित धाराओं में अपराध दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
न्यायालय के निर्देश पर दर्ज हुआ मामला
पुलिस के मुताबिक आशीष नगर रिसाली निवासी राजेन्द्र सिंह ने न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी, दुर्ग के समक्ष परिवाद प्रस्तुत किया था। न्यायालय के निर्देश के बाद नेवई पुलिस ने मामला दर्ज कर विवेचना शुरू की। शिकायतकर्ता के अनुसार उनके पुत्र हिमांशु सिंह की फर्म मेसर्स पिनाका एसोसिएट्स और विक्रांत एग्रोकेम इंडस्ट्रीज इंडिया प्राइवेट लिमिटेड के बीच वर्ष 2020 में अनुबंध हुआ था। इसके तहत फर्म को दुर्ग और रायपुर संभाग में कंपनी के कीटनाशक एवं अन्य कृषि उत्पादों की डिस्ट्रीब्यूटरशिप दी गई थी।
10 लाख एडवांस, 92 लाख का माल
शिकायत के अनुसार डिस्ट्रीब्यूटरशिप मिलने के बाद फर्म ने कंपनी को 10 लाख रुपए अग्रिम दिए। इसके बाद जुलाई से दिसंबर 2020 के बीच कंपनी की ओर से करीब 92.18 लाख रुपए का माल उपलब्ध कराया गया। शिकायतकर्ता का दावा है कि इसमें से करीब 63.26 लाख रुपए के माल की बिक्री फर्म के माध्यम से की गई। कुछ माल कंपनी के अधिकृत व्यक्तियों के निर्देश पर अलग-अलग लोगों और संस्थानों को दिए जाने की बात भी शिकायत में कही गई है।
लाइसेंस और GST को लेकर भी आरोप
शिकायत में आरोप लगाया गया है कि बाद में कंपनी की ओर से माल की बिक्री के लाइसेंस का नवीनीकरण नहीं कराया गया। कुछ जीएसटी बिलों में दर्ज जीएसटी नंबर के निलंबित होने से इनपुट टैक्स क्रेडिट का नुकसान होने तथा करीब 5 लाख रुपए अतिरिक्त भुगतान करने का दावा भी शिकायतकर्ता ने किया है।
लौटाए माल का स्टॉक नहीं मिला
शिकायतकर्ता के मुताबिक अनुबंध की शर्तों के अनुसार वापस किए गए माल के बदले नया स्टॉक उपलब्ध नहीं कराया गया। इससे करीब 28.92 लाख रुपए के नुकसान का दावा किया गया है। इसके अलावा जुलाई 2020 से जुलाई 2023 तक करीब 11.52 लाख रुपए गोदाम किराया और लगभग 3.16 लाख रुपए कमीशन बकाया होने की बात भी शिकायत में कही गई है।
भुगतान के बाद भी बकाया का दावा
शिकायत के अनुसार कंपनी की ओर से जुलाई 2020 से जनवरी 2021 के बीच करीब 64.90 लाख रुपए आरटीजीएस के जरिए भुगतान किए गए। हालांकि अलग-अलग मदों का हिसाब लगाने के बाद शिकायतकर्ता ने 65.68 लाख रुपए की राशि बकाया होने का दावा किया है।
आश्वासन देकर टालने का आरोप
शिकायतकर्ता का आरोप है कि बकाया रकम के भुगतान के लिए उसने और उसके पुत्र ने कंपनी से जुड़े संचालकों और डायरेक्टरों से लगातार संपर्क किया, लेकिन उन्हें भुगतान का आश्वासन देकर मामले को टाला जाता रहा। शिकायत में धमकी दिए जाने का आरोप भी लगाया गया है।
फोन बातचीत का भी जिक्र
शिकायत में जून 2025 की कथित फोन बातचीत का उल्लेख किया गया है। इसमें कंपनी से जुड़े रामानुज शर्मा द्वारा माल भेजने और माल प्राप्त होने के बाद भुगतान करने की बात कहे जाने का आरोप है। शिकायतकर्ता का कहना है कि निर्देश के अनुसार माल भेजने के बावजूद उसका भुगतान नहीं किया गया।
पुलिस खंगालेगी दस्तावेज
नेवई पुलिस ने तीनों आरोपियों के खिलाफ धारा 420, 409 और 34 भादवि के तहत अपराध दर्ज किया है। अब पुलिस अनुबंध, बैंक और आरटीजीएस लेनदेन, जीएसटी दस्तावेज, माल की सप्लाई और वापसी से संबंधित रिकॉर्ड तथा दोनों पक्षों के बीच हुए पूरे हिसाब-किताब की जांच करेगी।
