उरला पटवारी पर भ्रष्टाचार और अवैध प्लॉटिंग को संरक्षण देने का गंभीर आरोप, ग्रामीणों व किसानों ने कलेक्टर से की हटाने की मांग
11 वर्षों से एक ही क्षेत्र में प्रभाव, पिता के रसूख और प्रशासनिक मिलीभगत से बार-बार ट्रांसफर रद्द कराने की शिकायत; निष्पक्ष जांच की उठी मांग

दुर्ग। दुर्ग जिले के ग्राम उरला (हल्का नंबर 16) की महिला पटवारी निवेदिता राजपूत के खिलाफ ग्रामीणों और किसानों का आक्रोश फूट पड़ा है। स्थानीय जनप्रतिनिधियों और किसानों ने दुर्ग कलेक्टर को लिखित शिकायत सौंपकर पटवारी पर पद के दुरुपयोग, किसानों से अवैध वसूली और अवैध कॉलोनाइजरों को संरक्षण देने के गंभीर आरोप लगाए हैं। साथ ही उन्हें तत्काल पद से हटाने और वैधानिक कार्रवाई करने की मांग की गई है।
11 वर्षों से एक ही क्षेत्र में प्रभाव, काम के एवज में अवैध वसूली का आरोप
शिकायत पत्र में उल्लेख किया गया है कि पटवारी निवेदिता राजपूत का मूल निवास कार्यक्षेत्र से मात्र एक किलोमीटर की दूरी (सिकोला भाठा) पर है। स्थानीय रसूख का लाभ उठाकर वह पिछले करीब 11 वर्षों से इसी क्षेत्र में जमी हुई हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि नामांतरण, सीमांकन जैसे छोटे-छोटे राजस्व कार्यों के लिए किसानों और आम जनता से मनमाने पैसों की मांग की जाती है, जिससे क्षेत्रवासी लंबे समय से परेशान हैं।
ट्रांसफर के बाद भी मिलीभगत से वापसी
आवेदन में यह भी आरोप लगाया गया है कि पूर्व में शिकायतों के आधार पर पटवारी का प्रशासनिक स्थानांतरण कई बार किया जा चुका है, लेकिन महज एक-दो महीने के भीतर प्रशासनिक मिलीभगत और साठगांठ के चलते वह दोबारा उरला में ही पदस्थ हो जाती हैं। ग्रामीणों का कहना है कि उनके पिता पटवारी संघ के पूर्व अध्यक्ष रहे हैं, जिनके प्रशासनिक व राजनीतिक रसूख का इस्तेमाल कर नियमों को ताक पर रखा जा रहा है।
अवैध प्लॉटिंग में साठगांठ का दावा
किसानों ने बायपास टोल प्लाजा के पास स्थित ‘देवभूमि लेआउट्स’ के संचालक के साथ पटवारी और उनके परिवार की साठगांठ होने का गंभीर आरोप लगाया है। पत्र के अनुसार, क्षेत्र में चल रही अवैध प्लॉटिंग को संरक्षण दिया जा रहा है और इसी निजी स्वार्थ के चलते पटवारी बार-बार अपना तबादला रद्द कराकर उरला लौट आती हैं।
शासन स्तर पर भी भेजी गई प्रतिलिपि
इस मामले को लेकर वार्ड पार्षद और स्थानीय ग्रामीणों ने संयुक्त हस्ताक्षर युक्त ज्ञापन कलेक्टर के अलावा राज्य के वित्त एवं आवास मंत्री ओपी चौधरी, संभागायुक्त दुर्ग और मुख्य सचिव (राजस्व विभाग) को भी प्रेषित किया है। ग्रामीणों ने प्रशासन से निष्पक्ष जांच कर त्वरित कार्रवाई की मांग की है, ताकि क्षेत्र के किसानों को राहत मिल सके।


