60 साल से बसे परिवारों को उजाड़ने की तैयारी, कुटेला भाटा में प्रशासन के खिलाफ प्रदर्शन
IIT भिलाई के पास 100 से अधिक लोगों के आशियाने पर संकट, ग्रामीणों ने दी आंदोलन की चेतावनी


भिलाई। दुर्ग जिले में अहिवारा विधानसभा क्षेत्र के ग्राम पंचायत कुटेला भाटा में जमीन और बेदखली को लेकर विवाद गहरा गया है। वरिष्ठ नागरिक संघर्ष समिति के नेतृत्व में ग्रामीणों ने प्रशासन द्वारा जारी बेदखली नोटिस का विरोध करते हुए आंदोलन की चेतावनी दी है। ग्रामीणों का आरोप है कि माननीय हाईकोर्ट से स्थगन आदेश मिलने के बावजूद प्रशासन 17 परिवारों को जमीन से हटाने की तैयारी कर रहा है। इन परिवारों में करीब 100 से अधिक लोग निवास करते हैं।
समिति के अनुसार संबंधित परिवार पिछले लगभग 60 वर्षों से इस भूमि पर निवास कर रहे हैं। उनका कहना है कि वे शासन के नियमों के तहत भूमि का पट्टा लेने और निर्धारित राजस्व शुल्क जमा करने के लिए तैयार हैं। ग्रामीणों की मांग है कि उन्हें प्रति परिवार 5 डिसमिल भूमि आबंटित कर नियमित किया जाए ताकि वे सम्मानजनक जीवन जी सकें।
रविवार को ग्रामीणों ने प्रशासन के खिलाफ प्रदर्शन करते हुए आरोप लगाया कि एक प्रभावशाली राजनीतिक व्यक्ति को लाभ पहुंचाने के उद्देश्य से लंबे समय से निवासरत परिवारों को हटाने का प्रयास किया जा रहा है। प्रदर्शन में बड़ी संख्या में ग्रामीणों के साथ पंचायत प्रतिनिधि भी मौजूद रहे।
संघर्ष समिति ने पूरे मामले को लेकर गंभीर आरोप लगाए हैं। समिति का कहना है कि IIT भिलाई के निर्माण के दौरान क्षेत्र की कुछ जमीनों का अधिग्रहण किया गया था। इसी प्रक्रिया से जुड़े भूमि प्रकरण में कथित रूप से अनियमितता कर मुख्य मार्ग से लगी कीमती जमीन पर दावा करने की कोशिश की जा रही है। समिति ने प्रशासनिक कार्रवाई को इसी विवाद से जोड़ते हुए निष्पक्ष जांच की मांग की है।

ग्रामीणों का यह भी दावा है कि कुछ समय पहले प्रशासनिक अमला मकानों को हटाने पहुंचा था, लेकिन हाईकोर्ट के स्थगन आदेश की जानकारी दिए जाने के बाद कार्रवाई नहीं हो सकी। अब दोबारा नोटिस जारी होने से लोगों में चिंता और आक्रोश बढ़ गया है।
समिति ने कहा कि IIT भिलाई देश का प्रतिष्ठित शैक्षणिक संस्थान है और इसके आसपास किसी भी प्रकार के भूमि विवाद से क्षेत्र की छवि प्रभावित हो सकती है। उन्होंने शासन और प्रशासन से गरीब परिवारों के हितों को ध्यान में रखते हुए समाधान निकालने की मांग की है। ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि बेदखली की कार्रवाई आगे बढ़ाई गई तो आंदोलन को और व्यापक रूप दिया जाएगा। साथ ही उन्होंने कहा कि इस मुद्दे का असर आगामी नगरीय निकाय और विधानसभा चुनावों में भी देखने को मिल सकता है। हालांकि इस मामले में प्रशासन की ओर से आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। विवाद से जुड़े आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है।
