सेक्टर-9 अस्पताल के निजीकरण का विरोध तेज, बीएसपी वर्कर्स यूनियन ने प्रबंधन को दी आर-पार की लड़ाई की चेतावनी
भिलाई इस्पात संयंत्र के सेक्टर-9 अस्पताल के संभावित निजीकरण को लेकर बीएसपी वर्कर्स यूनियन ने कड़ा विरोध जताया है। यूनियन ने प्रबंधन के साथ बैठक में अस्पताल को निजी हाथों में सौंपने की चर्चा, मेडिक्लेम नीति में भेदभाव और रेफरल व्यवस्था की समस्याओं को प्रमुखता से उठाया।

भिलाई। भिलाई इस्पात संयंत्र (बीएसपी) के सेक्टर-9 अस्पताल के संभावित निजीकरण को लेकर कर्मचारियों के बीच चिंता बढ़ती जा रही है। इसी मुद्दे को लेकर बीएसपी वर्कर्स यूनियन के प्रतिनिधिमंडल ने सेक्टर-9 अस्पताल के अतिरिक्त प्रभार संभालने वाले कार्यपालक निदेशक अजय कुमार चक्रवर्ती के साथ इस्पात भवन स्थित सभागार में बैठक की। एक जुलाई 2026 को अतिरिक्त प्रभार मिलने के बाद यह किसी मान्यता प्राप्त यूनियन के साथ उनकी पहली औपचारिक बैठक बताई जा रही है।
बैठक के दौरान यूनियन अध्यक्ष उज्ज्वल दत्ता ने अस्पताल के निजीकरण के प्रस्ताव का कड़ा विरोध करते हुए कहा कि सेक्टर-9 अस्पताल केवल बीएसपी कर्मचारियों और उनके आश्रितों के लिए ही नहीं, बल्कि भिलाई और पूरे छत्तीसगढ़ के हजारों-लाखों लोगों के लिए स्वास्थ्य सेवाओं का प्रमुख केंद्र रहा है। उन्होंने कहा कि किसी भी स्थिति में अस्पताल को कॉरपोरेट संस्थानों के हवाले नहीं होने दिया जाएगा और यदि निजीकरण की दिशा में कदम बढ़ाए गए तो यूनियन कर्मचारियों और आम नागरिकों के साथ मिलकर व्यापक आंदोलन करेगी।
बैठक में कार्यपालक निदेशक अजय कुमार चक्रवर्ती ने बताया कि कंपनी की नीति के तहत अस्पताल के निजीकरण को लेकर प्रारंभिक स्तर पर चर्चा चल रही है। उन्होंने कहा कि यदि निर्धारित पात्रता शर्तों को पूरा करने वाले संस्थानों से बेहतर प्रस्ताव प्राप्त होते हैं तो प्रबंधन इस दिशा में निर्णय ले सकता है।
यूनियन ने बैठक में मेडिक्लेम नीति को लेकर भी आपत्ति दर्ज कराई। प्रतिनिधियों का कहना था कि कर्मचारियों और अधिकारियों के लिए चिकित्सा सुविधाओं में असमानता दिखाई दे रही है। यूनियन के अनुसार कर्मचारियों के लिए मेडिक्लेम राशि की सीमा निर्धारित की गई है, जबकि उच्च अधिकारियों और निदेशक वर्ग के लिए ऐसी कोई स्पष्ट सीमा नहीं है। यूनियन ने इसे भेदभावपूर्ण व्यवस्था बताते हुए समान चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध कराने की मांग की।

इसके अलावा कर्मचारियों को अन्य अस्पतालों में रेफर करने की प्रक्रिया को सरल बनाने का मुद्दा भी प्रमुखता से उठाया गया। यूनियन का आरोप था कि गंभीर मरीजों को बेहतर उपचार के लिए रेफरल प्राप्त करने में अनावश्यक कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है। कुछ मामलों में मरीजों और उनके परिजनों को लंबी प्रशासनिक प्रक्रिया के कारण परेशानी झेलनी पड़ती है।
बैठक के दौरान अस्पताल में व्याप्त अव्यवस्थाओं, मरीजों के प्रति व्यवहार और चिकित्सा सेवाओं की गुणवत्ता को लेकर भी चर्चा हुई। यूनियन ने अस्पताल में सुधारात्मक कदम उठाने और कर्मचारियों तथा मरीजों की शिकायतों का शीघ्र निराकरण करने की मांग की।
कार्यपालक निदेशक अजय कुमार चक्रवर्ती ने यूनियन प्रतिनिधियों को आश्वस्त किया कि अस्पताल में चिन्हित समस्याओं, व्यवस्थागत कमियों और मरीजों के प्रति व्यवहार संबंधी शिकायतों पर गंभीरता से काम किया जाएगा तथा आवश्यक सुधारात्मक कदम उठाए जाएंगे।
बैठक में यूनियन अध्यक्ष उज्ज्वल दत्ता, कार्यकारी महासचिव शिव बहादुर सिंह, अतिरिक्त महासचिव दिलेश्वर राव, वरिष्ठ उपाध्यक्ष अमित बर्मन, शेख मेहमूद, कृष्णामूर्ति, उप महासचिव विमलकांत पांडे, राजकुमार सिंह, प्रदीप सिंह, संदीप सिंह, वरिष्ठ सचिव धनंजय कुमार गिरी, ऋषभ घोष सहित अन्य पदाधिकारी उपस्थित रहे।
हालांकि अस्पताल के निजीकरण को लेकर अंतिम निर्णय अभी नहीं हुआ है, लेकिन इस मुद्दे ने बीएसपी कर्मचारियों और यूनियन के बीच बहस को तेज कर दिया है। आने वाले दिनों में इस विषय पर प्रबंधन और कर्मचारियों के बीच चर्चा और तेज होने की संभावना है।
