हरि राज रेस्टोरेंट के बाथरूम में हिडन कैमरा मिलने का मामला गरमाया, दोषियों की तत्काल गिरफ्तारी की मांग

बीएसपी वर्कर्स यूनियन अध्यक्ष उज्जवल दत्ता बोले, कैमरे के साथ मोबाइल, डीवीआर और अन्य डिजिटल उपकरणों की हो फॉरेंसिक जांच

हरि राज रेस्टोरेंट के बाथरूम में हिडन कैमरा मिलने का मामला गरमाया, दोषियों की तत्काल गिरफ्तारी की मांग

भिलाई। शहर के प्रतिष्ठित हरि राज रेस्टोरेंट के बाथरूम में कथित रूप से हिडन कैमरा मिलने का मामला गंभीर हो गया है। बीएसपी वर्कर्स यूनियन के अध्यक्ष उज्जवल दत्ता ने घटना को बेहद गंभीर और निंदनीय बताते हुए दोषियों की तत्काल गिरफ्तारी की मांग की है।

उज्जवल दत्ता ने कहा कि बाथरूम जैसे निजी स्थान पर हिडन कैमरा मिलना नागरिकों की निजता, सम्मान और सुरक्षा से जुड़ा गंभीर मामला है। पुलिस को इसे सामान्य घटना के रूप में नहीं लेना चाहिए। उन्होंने मांग की कि कैमरे की तकनीकी जांच के साथ उससे जुड़े मोबाइल, डीवीआर, कंप्यूटर, मेमोरी कार्ड और अन्य डिजिटल उपकरणों की फॉरेंसिक जांच कराई जाए।

उन्होंने कहा कि जांच में यह स्पष्ट किया जाना जरूरी है कि कैमरा किसने लगाया, कितने समय से लगा था और उससे कोई वीडियो रिकॉर्ड हुआ था या नहीं। यदि रिकॉर्डिंग हुई है तो उसे कहीं संग्रहित, भेजा या प्रसारित किया गया या नहीं, इसकी भी जांच होनी चाहिए।

उज्जवल दत्ता ने कहा कि यदि कैमरा लगाए जाने की जिम्मेदारी किसी कर्मचारी पर डाली जा रही है तो इसकी भी निष्पक्ष जांच आवश्यक है। पुलिस को संचालक सहित संबंधित सभी लोगों से पूछताछ कर पूरे मामले की कड़ियां जोड़नी चाहिए। जांच में किसी की संलिप्तता सामने आने पर तत्काल गिरफ्तारी और कठोर कानूनी कार्रवाई की जानी चाहिए।

उन्होंने कहा कि हरि राज जैसे प्रतिष्ठित प्रतिष्ठान में ऐसी घटना सामने आना पूरे शहर के लिए चिंता का विषय है। लोग होटल और रेस्टोरेंट में इस भरोसे के साथ जाते हैं कि उनकी निजता और गरिमा सुरक्षित रहेगी। इस विश्वास के साथ किसी भी तरह का खिलवाड़ गंभीर अपराध की श्रेणी में आता है।

उज्जवल दत्ता ने प्रशासन से मांग की कि मामले को केवल एक रेस्टोरेंट तक सीमित न रखा जाए। भिलाई के होटल, रेस्टोरेंट, लॉज, चेंजिंग रूम और अन्य सार्वजनिक स्थानों पर हिडन कैमरों की जांच के लिए विशेष अभियान चलाया जाए। महिलाओं और युवतियों की निजता और सुरक्षा को विशेष प्राथमिकता देने की भी उन्होंने मांग की।

उन्होंने कहा कि दोषियों के खिलाफ ऐसी कार्रवाई होनी चाहिए जिससे भविष्य में इस तरह की घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो। साथ ही, मामले की जांच बिना किसी दबाव के निष्पक्ष तरीके से पूरी कर आम नागरिकों को जांच की वास्तविक स्थिति से अवगत कराया जाना चाहिए, ताकि लोगों का प्रशासन और कानून व्यवस्था पर विश्वास बना रहे।