महंगाई के खिलाफ यूरोप में उबाल, कई देशों में हिंसक प्रदर्शन

कम वेतन, बढ़ती ईंधन कीमतों और बदहाल सार्वजनिक सेवाओं को लेकर नाराजगी, कई शहरों में पुलिस ने छोड़ी आंसू गैस

महंगाई के खिलाफ यूरोप में उबाल, कई देशों में हिंसक प्रदर्शन

पेरिस। यूरोप के कई देशों में बढ़ती महंगाई, कम वेतन और सार्वजनिक सेवाओं की खराब स्थिति के खिलाफ बड़े पैमाने पर प्रदर्शन होने की खबर है। फ्रांस, बेल्जियम, इटली और पुर्तगाल में बड़ी संख्या में लोग सड़कों पर उतरे। प्रदर्शनकारियों ने जीवनयापन की बढ़ती लागत, ईंधन की महंगी कीमतों और शिक्षा व्यवस्था से जुड़ी समस्याओं को लेकर नाराजगी जताई। कई स्थानों पर प्रदर्शन हिंसक हो गए, जिसके बाद पुलिस को भीड़ नियंत्रित करने के लिए आंसू गैस और बल प्रयोग करना पड़ा।

फ्रांस के कई शहरों में प्रदर्शन, दुकानों में लूटपाट

दिए गए विवरण के अनुसार, फ्रांस में करीब 5.5 लाख लोगों ने प्रदर्शनों में हिस्सा लिया। पेरिस, मार्सेई, नीस, नांत, बोर्डो, लिमोज, लिली, टूलूज और स्ट्रासबर्ग सहित कई शहरों में विरोध प्रदर्शन हुए। इस दौरान कुछ स्थानों पर दुकानों में लूटपाट और आगजनी की घटनाएं सामने आईं।

पेरिस में देर शाम तक कई जगह आग जलती रही। सामने आए वीडियो फुटेज में कुछ प्रदर्शनकारी सड़कों पर लगी आग को भड़काते दिखाई दिए। स्थिति को नियंत्रित करने के लिए दंगा नियंत्रण पुलिस ने आंसू गैस का इस्तेमाल किया और प्रदर्शनकारियों को हटाने के लिए बल प्रयोग किया।

ऐतिहासिक इमारत आग से क्षतिग्रस्त होने की खबर

प्रदर्शनों के बीच एक ऐतिहासिक इमारत में आग लगने की भी खबर सामने आई। उपलब्ध विवरण में इमारत को 143 साल पुराना फ्रांसीसी स्मारक बताया गया है। आग के कारण इमारत की छत नीचे की मंजिलों पर गिर गई, जिससे उसे नुकसान पहुंचा। हालांकि, स्मारक की पहचान, नुकसान की आधिकारिक पुष्टि और घटना में किसी के हताहत होने की जानकारी की स्वतंत्र पुष्टि आवश्यक है।

महंगाई और सार्वजनिक सेवाएं बनीं नाराजगी की वजह

प्रदर्शनकारियों की प्रमुख मांगों में बढ़ती जीवनयापन लागत पर नियंत्रण, बेहतर वेतन, ईंधन की कीमतों में राहत और सार्वजनिक सेवाओं की स्थिति में सुधार शामिल बताए गए हैं। स्कूलों की व्यवस्था को लेकर भी फ्रांस में नाराजगी सामने आई।

यूरोप के विभिन्न देशों में हुए इन प्रदर्शनों ने महंगाई और आम लोगों की क्रय शक्ति से जुड़े सवालों को फिर चर्चा में ला दिया है। हालांकि, प्रदर्शन में शामिल लोगों की संख्या, गिरफ्तारियों, घायलों और संपत्ति के नुकसान के आधिकारिक आंकड़ों की पुष्टि के बाद ही स्थिति की पूरी तस्वीर स्पष्ट हो सकेगी।