21 साल से आतंक की राह पर शाबिर, गिरफ्तारी और सजा भी नहीं बदल सकी सोच, नए हमले की साजिश नाकाम

21 साल से आतंक की राह पर शाबिर, गिरफ्तारी और सजा भी नहीं बदल सकी सोच, नए हमले की साजिश नाकाम

आतंक की दुनिया में कुछ चेहरे ऐसे होते हैं, जिन पर कानून का डर और सजा का असर दोनों बेअसर साबित होते हैं। ऐसा ही एक नाम है शाबिर, जो पिछले दो दशक से ज्यादा समय से आतंक के रास्ते पर चल रहा है। जांच एजेंसियों के मुताबिक, शाबिर का कट्टरपंथ की ओर झुकाव 2004-2005 के बीच शुरू हुआ। इसके बाद वह पाकिस्तान जाकर दो बार आतंकी ट्रेनिंग ले चुका है। यहीं से उसका जुड़ाव लश्कर-ए-तैयबा से हुआ और धीरे-धीरे वह संगठन का सक्रिय सदस्य बन गया।

पुलिस रिकॉर्ड बताता है कि शाबिर को 2007 और 2016 में भी गिरफ्तार किया गया था। 2016 में उसे जम्मू-कश्मीर के परिमपोरा इलाके से हथियारों के साथ पकड़ा गया था, लेकिन सजा के बावजूद उसमें कोई सुधार नहीं आया। जांच में यह भी सामने आया है कि गांदरबल के कंगन स्थित उसके घर पर कई कुख्यात आतंकी आते-जाते थे। यहीं उसके संपर्क बड़े आतंकियों से बने और उसे संगठन में गहराई से शामिल किया गया। बताया जा रहा है कि शाबिर का संबंध 26/11 हमले के मास्टरमाइंड हाफिज सईद और ऑपरेशन चीफ जकीउर रहमान लखवी तक से रहा है। पाकिस्तान में बैठे हैंडलर्स के निर्देश पर वह लगातार अपनी गतिविधियां बदलता रहा।

2025 में उसे निर्देश मिला कि कश्मीर से बाहर अन्य राज्यों और बांग्लादेशी युवाओं को निशाना बनाया जाए। इसके बाद उसने अपनी लोकेशन बदली और हरियाणा के गुरुग्राम में आकर बस गया। यहीं उसने नए युवाओं को अपने जाल में फंसाना शुरू किया। जांच एजेंसियों के अनुसार, उसने कोलकाता को अपना नया बेस बनाया और वहां से बड़े आतंकी हमले की साजिश रच रहा था। तमिलनाडु से बांग्लादेशी नागरिकों को लाकर उन्हें इस नेटवर्क में शामिल करने की योजना भी बनाई गई थी। दिल्ली और कोलकाता में लगे देशविरोधी पोस्टर सिर्फ प्रचार नहीं थे, बल्कि यह एक तरह का टेस्ट था। शाबिर यह परखना चाहता था कि उसके नेटवर्क से जुड़े लोग बिना पकड़े कितनी प्रभावी तरीके से काम कर सकते हैं।