परफेक्ट इंस्पेक्शन सर्विसेज में धूमधाम से मनाई गई विश्वकर्मा जयंती, जिले और प्रदेश की सुख-समृद्धि की कामना

परफेक्ट इंस्पेक्शन सर्विसेज में धूमधाम से मनाई गई विश्वकर्मा जयंती, जिले और प्रदेश की सुख-समृद्धि की कामना

भिलाई। दुर्ग जिले में जहां अधिकांश स्थानों पर 17 सितंबर को भगवान विश्वकर्मा जयंती मनाई गई, वहीं बंगाली समुदाय ने अपनी पारंपरिक पंचांग गणना के अनुसार 18 सितंबर को विश्वकर्मा पूजा का आयोजन किया। बंगाली समाज से जुड़े लोगों ने विभिन्न स्थानों पर भगवान विश्वकर्मा की प्रतिमा स्थापित कर विधि-विधान से पूजा-अर्चना की और जिले व प्रदेश की सुख-समृद्धि की कामना की।

लाइट इंडस्ट्रियल एरिया भिलाई स्थित परफेक्ट इंस्पेक्शन सर्विसेज में शुक्रवार को विश्वकर्मा जयंती धूमधाम से मनाई गई। कंपनी संचालक एवं भिलाई बंगाली समाज के पूर्व अध्यक्ष डीके दत्त ने बताया कि इस वर्ष विश्वकर्मा पूजा की तारीख को लेकर एक दिन का अंतर रहा। देश के अधिकांश हिस्सों में 17 सितंबर को पूजा आयोजित की गई, जबकि पश्चिम बंगाल और बंगाली समुदाय की पारंपरिक पंचांग गणना के अनुसार 18 सितंबर को विश्वकर्मा पूजा मनाई गई।

डीके दत्त ने बताया कि विश्वकर्मा पूजा की तिथि सूर्य की कन्या संक्रांति और क्षेत्रीय पंचांग की गणना से निर्धारित होती है। बंगाली सौर पंचांग में भाद्र संक्रांति यानी भाद्र मास के अंतिम दिन का विशेष महत्व है। इसी गणना के चलते इस वर्ष बंगाली समुदाय ने 18 सितंबर को भगवान विश्वकर्मा की पूजा की।

सुबह से ही कारखानों, वर्कशॉप, दुकानों और घरों में पूजा की तैयारियां शुरू हो गई थीं। भगवान विश्वकर्मा की विधि-विधान से पूजा कर कार्यक्षेत्र में सफलता, सुख-समृद्धि और परिवार की खुशहाली की कामना की गई। कई स्थानों पर प्रसाद वितरण और सांस्कृतिक कार्यक्रम भी आयोजित किए गए।

परफेक्ट इंस्पेक्शन सर्विसेज में आयोजित कार्यक्रम में वैशाली नगर, राधिका नगर, रिसाली और टंकी मरोदा क्षेत्र से बड़ी संख्या में बंगाली समाज के पदाधिकारी एवं सदस्य शामिल हुए। इस अवसर पर डीके दत्ता, भिलाई बंगाली समाज अध्यक्ष सुप्रभात पाल, मानव सेन, बिमान दास गोरा, सुबीर भट्टाचार्य, राजदीप सेन, सोवेन बागची, रंगोन दा, मीडिया प्रभारी सुवांकर रॉय सहित परफेक्ट इंस्पेक्शन सर्विसेज के कर्मचारी मौजूद रहे।

बंगाली पंचांग के कारण एक दिन का अंतर

पश्चिम बंगाल के अलावा पूर्वी भारत के कुछ हिस्सों, जैसे असम और त्रिपुरा में भी विश्वकर्मा पूजा की तिथि पारंपरिक बंगाली सौर पंचांग के अनुसार निर्धारित की जाती है। यहां भाद्र मास के अंतिम दिन यानी भाद्र संक्रांति पर भगवान विश्वकर्मा की पूजा करने की परंपरा है।

बंगाली सौर कैलेंडर में महीनों की अवधि सूर्य की गति के आधार पर निर्धारित होती है। इसी क्षेत्रीय पंचांग गणना के कारण वर्ष 2026 में भाद्र मास का अंतिम दिन 18 सितंबर को पड़ा। इसलिए बंगाली समुदाय ने 18 सितंबर को विश्वकर्मा जयंती मनाई, जबकि देश के कई अन्य हिस्सों में यह पर्व 17 सितंबर को मनाया गया।