सरकारी नौकरी में ‘डबल रोल’ महंगा पड़ा, व्याख्याता निलंबित
एलआईसी एजेंट, क्रिप्टो और नेटवर्क मार्केटिंग में सक्रियता के आरोप; 12 साल तक समानांतर काम, जांच में पुष्टि

दुर्ग। शासकीय कर्तव्यों की अनदेखी और सेवा नियमों के उल्लंघन के मामले में दुर्ग संभाग आयुक्त सत्य नारायण राठौर ने सख्त कार्रवाई करते हुए स्वामी आत्मानंद उत्कृष्ट अंग्रेजी माध्यम विद्यालय, घुमका (राजनांदगांव) में पदस्थ व्याख्याता सहदेव बारले को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है।

जांच में सामने आया कि सहदेव बारले शिक्षण कार्य से अलग एलआईसी एजेंट के रूप में सक्रिय थे और साथ ही क्रिप्टो करेंसी व नेटवर्क मार्केटिंग जैसी गतिविधियों में भी शामिल थे। सोशल मीडिया के जरिए ‘मनी बैंक’ योजना में निवेश के लिए लोगों को प्रेरित करने के आरोप भी उनके खिलाफ लगे हैं।

मामले की जांच संभागीय संयुक्त संचालक (शिक्षा) द्वारा कराई गई थी, जिसमें यह तथ्य प्रमाणित हुआ कि बारले लगभग 12 वर्षों से एलआईसी एजेंट के रूप में काम कर रहे थे। उन्होंने खुद भी इसे स्वीकार किया है। जांच के दौरान यह भी सामने आया कि नेटवर्क मार्केटिंग की बैठकों में उनकी नियमित भागीदारी थी।

एक गंभीर पहलू यह भी सामने आया कि शिकायतकर्ता के परिवार के सदस्य को एक निजी कंपनी में लाखों रुपए निवेश करने के लिए प्रेरित किया गया था। निवेश डूबने के बाद संबंधित व्यक्ति मानसिक तनाव में आ गया और उसकी मृत्यु हो गई।
इसके अलावा बारले पर शाला विकास एवं प्रबंधन समिति के नियमों की अनदेखी करने का आरोप भी साबित हुआ। उन्होंने समिति के अध्यक्ष और सदस्यों को दरकिनार कर समानांतर बैठकें आयोजित कीं और खुद को प्रभारी प्राचार्य बनाने के लिए पत्राचार भी किया।
इन सभी तथ्यों को देखते हुए संभाग आयुक्त ने इसे छत्तीसगढ़ सिविल सेवा (आचरण) नियम 1965 के नियम 03 और 16 का उल्लंघन मानते हुए निलंबन की कार्रवाई की है। निलंबन अवधि में उनका मुख्यालय विकासखंड शिक्षा अधिकारी कार्यालय, छुईखदान (जिला खैरागढ़-छुईखदान-गंडई) निर्धारित किया गया है और उन्हें नियमानुसार जीवन निर्वाह भत्ता मिलेगा।

