बायोमेट्रिक फेस रीडर के बाद अब RFID लागू करने से भड़के कर्मचारी, बीएसपी प्रबंधन से यूनियन ने पूछे तीखे सवाल

बायोमेट्रिक फेस रीडर के बाद अब RFID लागू करने से भड़के कर्मचारी, बीएसपी प्रबंधन से यूनियन ने पूछे तीखे सवाल

भिलाई। बीएसपी वर्कर्स यूनियन की साप्ताहिक बैठक में विभिन्न विभागों से उपस्थित कर्मचारियों ने प्रबंधन द्वारा बायोमेट्रिक फेस रीडर व्यवस्था के बाद अब RFID (रेडियो फ्रीक्वेंसी आइडेंटिफिकेशन) आधारित उपस्थिति एवं निगरानी प्रणाली लागू करने की प्रक्रिया पर गंभीर प्रश्न उठाए। कर्मचारियों का कहना था कि जब संयंत्र और कर्मचारियों से जुड़े अनेक महत्वपूर्ण मुद्दे लंबे समय से लंबित हैं, तब प्रबंधन का ध्यान मूल समस्याओं के समाधान के बजाय कर्मचारियों पर नए-नए प्रयोग लागू करने पर अधिक दिखाई दे रहा है।

बैठक में कर्मचारियों ने प्रश्न किया कि कर्मचारियों के अंशदान से संचालित सेवा (SEWA) संस्था में जमा राशि का पूरा विवरण और लेखा-जोखा आज तक कर्मचारियों को क्यों नहीं दिया गया। कर्मचारियों और यूनियन द्वारा बार-बार मांग किए जाने के बावजूद सेवा की वार्षिक आम सभा (AGM) आयोजित क्यों नहीं की जा रही है। सेवा की प्रबंधन समिति का गठन लंबे समय से लंबित क्यों है और कर्मचारियों के धन के उपयोग एवं प्रबंधन में पारदर्शिता क्यों नहीं दिखाई जा रही है। कर्मचारियों ने अस्पताल की बदहाल व्यवस्था पर भी चिंता व्यक्त की। बैठक में बताया गया कि अस्पताल में खराब पड़ी सीटी स्कैन मशीन को लगभग एक वर्ष बीत जाने के बाद भी चालू नहीं कराया जा सका है। डायलिसिस मशीन की खरीद अब तक नहीं हो पाई है, जबकि इसकी आवश्यकता लगातार महसूस की जा रही है। सोनोग्राफी जांच के लिए मरीजों को एक से डेढ़ महीने बाद की तारीख मिल रही है, जिससे कर्मचारियों और उनके परिवारों को गंभीर कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है।

बी 12 और विटामिन डी की जांच एक वर्ष से नहीं हो पा रहा है 1500 देकर कर्मियों को बाहर से जांच करनी पड़ रही है। कर्मचारियों ने पूछा कि स्वास्थ्य सेवाओं से जुड़े इन महत्वपूर्ण मुद्दों पर प्रबंधन अपेक्षित गंभीरता क्यों नहीं दिखा रहा है। बैठक में यह भी कहा गया कि एक वर्ष से अधिक समय बीत जाने के बावजूद बेस कैंटीन का टेंडर पूरा नहीं हो पाया है। परिणामस्वरूप बड़ी संख्या में कर्मचारियों को गुणवत्तापूर्ण एवं व्यवस्थित भोजन सुविधा उपलब्ध नहीं हो रही है। कर्मचारियों का कहना था कि उत्पादन और कार्यक्षमता बढ़ाने की बात करने वाला प्रबंधन कर्मचारियों की मूलभूत सुविधाओं को सुनिश्चित करने में विफल साबित हो रहा है। यूनियन ने हाल ही में सामने आई करोड़ों रुपये मूल्य की सामग्री चोरी की घटनाओं पर भी गंभीर चिंता व्यक्त की। कर्मचारियों ने कहा कि संयंत्र में लगभग 600 सीसीटीवी कैमरे, RFID जैसी व्यवस्थाएं तथा केंद्रीय सुरक्षा एजेंसियों की तैनाती होने के बावजूद इतनी बड़ी चोरी की घटनाओं पर प्रभावी रोक नहीं लग पाना कई गंभीर प्रश्न खड़े करता है। कर्मचारियों का मानना है कि यदि इन मामलों की निष्पक्ष एवं गहन जांच कराई जाए तो अनेक ऐसे तथ्य सामने आ सकते हैं जो सभी को चौंका देंगे।

बैठक में उपस्थित कर्मचारियों ने प्रबंधन से यह भी जानना चाहा कि कर्मचारियों पर लगातार नई-नई निगरानी प्रणालियां और प्रयोग लागू करने की आवश्यकता क्यों महसूस की जाती है, जबकि संयंत्र के संचालन, सुरक्षा, उत्पादन, चिकित्सा सुविधाओं, कैंटीन व्यवस्था तथा कर्मचारियों के कल्याण से जुड़े अनेक महत्वपूर्ण मुद्दे वर्षों से लंबित पड़े हैं। कर्मचारियों का कहना था कि प्रबंधन को अपना पूरा ध्यान संयंत्र के संरक्षण, उत्पादन वृद्धि, सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने तथा कर्मचारियों की वास्तविक समस्याओं के समाधान पर केंद्रित करना चाहिए। बैठक के अंत में यूनियन ने कहा कि कर्मचारियों की जायज मांगों, कल्याणकारी सुविधाओं और संयंत्र हित से जुड़े मूल मुद्दों की अनदेखी कर केवल निगरानी आधारित नई व्यवस्थाएं लागू करना समस्याओं का समाधान नहीं है। प्रबंधन को पहले कर्मचारियों के विश्वास को मजबूत करने, पारदर्शिता सुनिश्चित करने तथा लंबित समस्याओं के निराकरण की दिशा में ठोस कदम उठाने चाहिए। तभी कर्मचारियों और प्रबंधन के बीच बेहतर औद्योगिक संबंध स्थापित हो सकेंगे तथा संयंत्र के उज्ज्वल भविष्य का मार्ग प्रशस्त होगा और प्रबंधक आर एफ आई डी जैसे प्रयोग बंद करे।
बैठक में प्रमुख रूप से यूनियन के अध्यक्ष उज्जवल दत्ता , महासचिव खूब चंद वर्मा, कार्यकारी महासचिव शिवबहादुर सिंह, अतरिक्त महासचिव दिलेश्वर राव, वरिष्ठ उपाध्यक्ष अमित बर्मन, शेख महमूद, उप महासचिव विमल पांडे, मनोज डडसेना, प्रदीप सिंग, संदीप सिंह, सुरेश सिंह, धनंजय गिरि, लुमेश कुमार, अभिषेक सिंह, डी पी सिंह, रविशंकर सिंह, रामचंद्र साहू, सुभाष महाराणा, रेंजी नायर, रुपेंद्र बडबड, विभीषण राव , रणजीत कुमार प्रमुख रूप से उपस्थित थे।