राग, रंग और रस से सराबोर हुआ ‘उच्छास’, पोइला बैशाख पर बिखरी सांस्कृतिक छटा

भिलाई। सूर्याविहार कॉलोनी, भिलाई स्थित सूर्या सदन में बंगला नववर्ष पोइला बैशाख के अवसर पर आयोजित पारंपरिक सांस्कृतिक श्रृंखला “उच्छास” ने एक बार फिर शहरवासियों को राग, रंग और रस के अद्भुत संगम से सराबोर कर दिया। पिछले 16 वर्षों से निरंतर आयोजित हो रहा यह कार्यक्रम इस वर्ष भी भव्यता और गरिमा के साथ संपन्न हुआ।

कार्यक्रम में कला साहित्य अकादमी, छत्तीसगढ़ (कवच) के अध्यक्ष एवं वरिष्ठ कलाकार शक्ति चक्रवर्ती मुख्य अतिथि, बबलू बिस्वास,सचिव और शांतनु दासगुप्ता ,प्रवक्ता एवं प्रचार-प्रसार प्रमुख विशिष्ट अतिथि के रूप में अपनी गरिमामयी उपस्थिति दर्ज कराई। कार्यक्रम की शुरुआत अंकिता दास के नृत्य के साथ हुई इसके पश्चात “उच्छास” टीम के कलाकारों ने सुमधुर समूह गीत एवं नृत्यों की प्रस्तुति के साथ कविता पाठ,श्रुति नाटक प्रस्तुत किया। जिसने नववर्ष के स्वागत को भावपूर्ण स्वर दिए। इसके बाद आमंत्रित संस्था “तिहाई डांस अकादमी” के नन्हे कलाकारों ने अमृता सान्याल के निर्देशन में मनमोहक नृत्य प्रस्तुत कर दर्शकों की खूब तालियां बटोरीं। गायक श्री कृष्णा सुतर,श्री तुहिनाद्री सन्याल,श्रीमती गार्गी तरफदार सहित अन्य कलाकारों की सुरमयी प्रस्तुतियों ने पूरे वातावरण को संगीत की मधुरता से भर दिया।

इसी क्रम में श्री सुब्रत बैद्य एवं उनकी टीम द्वारा प्रस्तुत लाइव बैंड ने कार्यक्रम में ऊर्जा और उत्साह का संचार किया। काव्य-पाठ के सत्र ने आयोजन को साहित्यिक ऊंचाई प्रदान करते हुए श्रोताओं को विचारों की गहराई से जोड़ा।श्रुति नाटक की जबरदस्त प्रस्तुति ने भिलाई रंगमंच को समृद्ध किया। इस सफल आयोजन के पीछे “उच्छास” टीम का समर्पण और सशक्त नेतृत्व विशेष रूप से उल्लेखनीय रहा। श्रीमती शर्मिष्ठा नंदी एवं श्रीमती शिखा मोइत्रा के कुशल मार्गदर्शन एवं निर्देशन में संपूर्ण प्रस्तुति एवं आयोजन को साकार रूप दिया गया।सम्पूर्ण कार्यक्रम का संचालन सुवर्णा सुतर ने प्रभावी ढंग से किया।सम्पूर्ण आयोजन एवं प्रस्तुतियों में सूर्यविहार की घरेलू महिलाओं की सक्रिय भागीदारी ने बेहद प्रभावित किया।

इसमें उच्छास टीम के श्रीमती कृष्णा पॉल, मित्रा,संजना खटखड़े,बोन्या मुखर्जी,काकोली कुंडू,अंजना भट्टाचार्य, अनिंदिता रॉय चौधरी, सुतपा कानरार, कनक सरकार,पारोमिता मुखर्जी, सोमा रॉय, श्राबनी दास एवं श्राबंती चक्रवर्ती ने सक्रिय सहभागिता निभाते हुए आयोजन को भव्य एवं सफल बनाने में महत्वपूर्ण योगदान दिया। यह सांस्कृतिक संध्या केवल मनोरंजन तक सीमित नहीं रही, बल्कि बंगाली समाज की समृद्ध परंपरा, सांस्कृतिक विरासत और सामाजिक एकता का सशक्त संदेश भी देती नजर आई। कार्यक्रम ने यह भी सिद्ध किया कि अपनी जड़ों से जुड़ाव ही सांस्कृतिक पहचान को जीवंत बनाए रखता है। नववर्ष के इस उत्सव ने उपस्थित सभी लोगों के जीवन में नई ऊर्जा, सुख-समृद्धि और आशा का संदेश देते हुए मधुर स्मृतियों के साथ समापन किया।

