राशन के चावल का खेल! घर में छिपाकर रखी थीं 24 क्विंटल शासकीय चावल की 60 बोरियां, आरोपी गिरफ्तार

वैशाली नगर पुलिस की कार्रवाई, PDS में पात्र हितग्राहियों को बांटे जाने वाले चावल के अवैध क्रय-विक्रय और भंडारण का आरोप

राशन के चावल का खेल! घर में छिपाकर रखी थीं 24 क्विंटल शासकीय चावल की 60 बोरियां, आरोपी गिरफ्तार

दुर्ग। सार्वजनिक वितरण प्रणाली (PDS) के तहत पात्र राशन कार्डधारियों को वितरित किए जाने वाले शासकीय चावल के अवैध क्रय-विक्रय और भंडारण के मामले में वैशाली नगर पुलिस ने कार्रवाई करते हुए एक आरोपी को गिरफ्तार किया है। पुलिस ने आरोपी के मकान से 60 बोरियों में कुल 24 क्विंटल शासकीय चावल बरामद किया है।

मामला राजीव नगर, वार्ड क्रमांक 19, थाना वैशाली नगर क्षेत्र का है। पुलिस के अनुसार खाद्य निरीक्षक आशुतोष चंद्राकर की शिकायत और प्रस्तुत दस्तावेजों के आधार पर आरोपी के खिलाफ अपराध क्रमांक 374/2026 दर्ज किया गया था। मामले में धारा 3 और 7 आवश्यक वस्तु अधिनियम, 1955 के तहत अपराध पंजीबद्ध कर जांच शुरू की गई।

मकान की तलाशी में मिलीं 60 बोरियां

विवेचना के दौरान पुलिस ने आरोपी सोहन चेलक (23 वर्ष) के मकान की तलाशी ली। इस दौरान वहां सार्वजनिक वितरण प्रणाली के माध्यम से राशन कार्डधारियों को वितरित किया जाने वाला चावल 60 बोरियों में कुल 24 क्विंटल पाया गया। बरामद चावल वास्तव में शासकीय खाद्यान्न है या नहीं, इसकी पुष्टि नागरिक आपूर्ति निगम के तकनीकी सहायक के माध्यम से कराई गई। जांच में खाद्यान्न के शासकीय होने की पुष्टि होने के बाद पुलिस ने आरोपी को गिरफ्तार कर आवश्यक वैधानिक कार्रवाई की। पुलिस के अनुसार आरोपी द्वारा पात्र राशन कार्डधारियों को वितरित किए जाने वाले शासकीय खाद्यान्न का अवैध रूप से क्रय-विक्रय और अदला-बदली कर उसे अपने मकान में भंडारित किया गया था। अब जांच में यह भी महत्वपूर्ण होगा कि इतनी बड़ी मात्रा में शासकीय चावल आरोपी तक कैसे पहुंचा और इस अवैध कारोबार में उसके साथ और कौन-कौन लोग जुड़े हैं।

पहले भी दर्ज हो चुका है मामला

पुलिस के अनुसार आरोपी सोहन चेलक के खिलाफ इससे पहले भी थाना पुलगांव, जिला दुर्ग में अपराध क्रमांक 151/2022 के तहत धारा 186, 294, 506, 34 भादवि का मामला दर्ज पाया गया है।

24 क्विंटल चावल जब्त

वैशाली नगर पुलिस ने आरोपी के कब्जे से 60 बोरी शासकीय चावल, कुल वजन 24 क्विंटल जब्त किया है। पुलिस अब मामले में आगे की विवेचना कर रही है कि शासकीय राशन की इतनी बड़ी खेप आरोपी के पास कैसे पहुंची और इसके पीछे किसी बड़े नेटवर्क की भूमिका तो नहीं है।