केन्द्रीय जेल दुर्ग में न्यायिक निरीक्षण, ‘न्यायश्रुति’ और ‘ई-साक्ष्य’ पर जोर

बंदियों के अधिकार, विधिक सहायता, स्वास्थ्य और परिवारों की समस्याओं की हुई समीक्षा

केन्द्रीय जेल दुर्ग में न्यायिक निरीक्षण, ‘न्यायश्रुति’ और ‘ई-साक्ष्य’ पर जोर

दुर्ग। प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश के. विनोद कुजूर ने शुक्रवार को केन्द्रीय जेल दुर्ग का निरीक्षण कर बंदियों के अधिकारों, विधिक सहायता, स्वास्थ्य, स्वच्छता, भोजन, प्रकरणों की स्थिति और पुनर्वास व्यवस्था की समीक्षा की। निरीक्षण के दौरान न्यायिक प्रक्रिया में तकनीक के उपयोग, विशेष रूप से ‘न्यायश्रुति’ और ‘ई-साक्ष्य’ पर विशेष जोर दिया गया।

प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश ने कहा कि न्यायिक प्रक्रिया को जेल में निरुद्ध प्रत्येक व्यक्ति तक समयबद्ध और प्रभावी तरीके से पहुंचना चाहिए। उन्होंने जेल प्रशासन, विधिक सेवा व्यवस्था और न्यायालयीन प्रक्रिया के बीच बेहतर तकनीकी समन्वय की आवश्यकता पर जोर दिया।

निरीक्षण के दौरान ‘न्यायश्रुति’ के माध्यम से न्यायिक कार्यवाही एवं साक्ष्य से जुड़ी प्रक्रियाओं तथा ‘ई-साक्ष्य’ के जरिए इलेक्ट्रॉनिक और डिजिटल साक्ष्यों के न्यायालयीन उपयोग को लेकर आवश्यक जानकारी और जागरूकता पर चर्चा की गई।

सजायाफ्ता बंदियों के अपील संबंधी प्रकरणों को अद्यतन रखने और उन्हें अपने मामलों की वर्तमान स्थिति की जानकारी देने के निर्देश जेल अधिकारियों को दिए गए। नव-आगंतुक बंदियों को भी उनके प्रकरण की जानकारी प्राप्त करने की प्रक्रिया समझाई गई। निजी अधिवक्ता नियुक्त करने में असमर्थ बंदियों को जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के माध्यम से निःशुल्क विधिक सहायता उपलब्ध कराने की जानकारी दी गई।

परिवारों की समस्याओं पर भी फोकस

निरीक्षण के दौरान NALSA की SPRUHA Scheme, 2025 के तहत बंदियों के आश्रित परिवारों की स्थिति की भी जानकारी ली गई। पत्नी, बच्चों और वृद्ध माता-पिता की आजीविका, शिक्षा, स्वास्थ्य, भरण-पोषण और दैनिक जरूरतों से जुड़ी समस्याओं की पहचान करने के निर्देश दिए गए।

पात्र परिवारों को जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के माध्यम से सहायता दिलाने तथा केंद्र और राज्य सरकार की पात्र कल्याणकारी योजनाओं से जोड़ने के लिए आवश्यक कार्रवाई के निर्देश दिए गए। पैरा लीगल वालेंटियर्स (PLVs) को परिवारों तक पहुंचकर फील्ड स्तर पर उनकी वास्तविक समस्याओं का सत्यापन करने और संबंधित विभागों से समन्वय करने की जिम्मेदारी देने पर भी जोर दिया गया।

स्वास्थ्य और पुनर्वास को प्राथमिकता

जेल में ऐसे बंदियों की जानकारी भी जिला विधिक सेवा प्राधिकरण को उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए, जो परिहार का लाभ प्राप्त करने के पात्र हो सकते हैं और जिनके आवेदन लंबित हैं।

निरीक्षण के दौरान मानवीय गरिमा, स्वच्छता, स्वास्थ्य, पोषण, मानसिक स्वास्थ्य, सुरक्षा, विधिक सहायता और पुनर्वास से जुड़ी व्यवस्थाओं को प्राथमिकता देने के निर्देश दिए गए। साथ ही शंकर महतो प्रकरण में सुप्रीम कोर्ट द्वारा प्रतिपादित सिद्धांतों और दिशा-निर्देशों के पालन पर जोर दिया गया।

निरीक्षण में मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट भूपेश कुमार बसंत, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण दुर्ग के सचिव उमेश कुमार भागवतकर, जेल अधीक्षक सहित अन्य अधिकारी और कर्मचारी मौजूद रहे।