एफसीआई दुर्ग के 44 हेल्परों को काम से हटाया, मजदूर संघ ने कलेक्टर से लगाई न्याय की गुहार

दुर्ग। भारतीय खाद्य निगम एफसीआई धमधा नाका दुर्ग में कार्यरत 44 हेल्पर श्रमिकों को काम से निकालने का मामला समाने आया है। छत्तीसगढ़ हमाल मजदूर संघ ने दुर्ग कलेक्टर को ज्ञापन सौंपकर श्रमिकों के साथ अन्याय किए जाने का आरोप लगाया है। संघ ने प्रशासन से मामले में तत्काल हस्तक्षेप कर श्रमिकों को न्याय दिलाने और उनकी समस्याओं का शीघ्र समाधान कराने की मांग की है।
मजदूर संघ के महासचिव भीमराव बागड़े की ओर से सौंपे गए ज्ञापन में कहा गया है कि एफसीआई दुर्ग संस्थान में वर्षों से कार्यरत 44 हेल्पर श्रमिकों को 3 अगस्त 2026 से अचानक ड्यूटी पर नहीं लिया जा रहा है। इसके कारण श्रमिकों के सामने रोजगार और आजीविका का संकट खड़ा हो गया है। संघ का आरोप है कि काम नहीं मिलने के साथ ही श्रमिकों को वेतन भी नहीं दिया जा रहा है। ज्ञापन में यह भी आरोप लगाया गया है कि संबंधित ठेकेदार उदय कुमार यादव से कई बार समस्या के समाधान की मांग की गई, लेकिन अब तक कोई ठोस पहल नहीं की गई। संघ का कहना है कि ठेकेदार केवल लगभग 20 श्रमिकों को काम पर रखने की बात कर रहा है, जबकि शेष 24 श्रमिकों को काम से वंचित किया जा रहा है। इससे प्रभावित श्रमिकों और उनके परिवारों के सामने आर्थिक संकट उत्पन्न हो गया है। कलेक्टर से अनुरोध किया गया है कि एसडीएम, नगर पुलिस अधीक्षक, एफसीआई प्रबंधन, ठेकेदार और मजदूर संघ के प्रतिनिधियों की संयुक्त बैठक बुलाकर पूरे मामले का समाधान कराया जाए, ताकि सभी प्रभावित श्रमिकों को पुनः काम मिल सके और उनके बकाया वेतन का भुगतान सुनिश्चित हो सके। मजदूर संघ ने वेतन भुगतान को लेकर भी गंभीर आरोप लगाए हैं। ज्ञापन के अनुसार, पहले भी श्रमिकों से पूरे महीने काम कराया जाता था, लेकिन भुगतान के समय चार से पांच हाजिरी का वेतन काट लिया जाता था। इसके अलावा मई, जून और जुलाई 2026 के वेतन में भी प्रति श्रमिक तीन से चार हजार रुपए तक की कटौती किए जाने का आरोप लगाया गया है।
श्रम आयुक्त के समक्ष शिकायत के बाद हुआ था समझौता, अब वादाखिलाफी का आरोप
मजदूरों का आरोप है कि 5 मई 2026 को क्षेत्रीय श्रम आयुक्त केन्द्रीय रायपुर के समक्ष शिकायत दर्ज होने के बाद यूनियन और ठेकेदार के बीच समझौता हुआ था, लेकिन बाद में ठेकेदार अपने वादे से मुकर गया और कई श्रमिकों को काम से बाहर कर दिया। यूनियन ने ठेकेदार पर निर्धारित न्यूनतम वेतन नहीं देने का आरोप लगाते हुए दावा आवेदन प्रस्तुत किया था। सुनवाई के दौरान यूनियन ने बताया था कि ठेकेदार और श्रमिकों के बीच समझौता हो गया है। ठेकेदार पक्ष ने भी न्यूनतम वेतन के अनुसार भुगतान किए जाने की बात कही, जिसके बाद यूनियन ने अपना दावा वापस ले लिया। इसके आधार पर क्षेत्रीय श्रम आयुक्त ने 8 मई को दावा आवेदन का निराकरण कर दिया। हालांकि अब श्रमिकों का आरोप है कि समझौते के बाद भी ठेकेदार ने अपनी प्रतिबद्धता का पालन नहीं किया। उनका कहना है कि ठेकेदार बाद में अपने वादे से मुकर गया और कई मजदूरों को काम से बाहर कर दिया।
