दुर्ग जिला अस्पताल में चमत्कार, 720 ग्राम के समयपूर्व नवजात को मिली नई जिंदगी

दुर्ग जिला अस्पताल के एसएनसीयू में 720 ग्राम वजन के अति-समयपूर्व नवजात का दो महीने से अधिक समय तक सफल उपचार किया गया। जन्म के समय गंभीर हालत में रहे नवजात का वजन अब 1.4 किलोग्राम हो गया है और उसे स्वस्थ होकर घर भेज दिया गया।

दुर्ग जिला अस्पताल में चमत्कार, 720 ग्राम के समयपूर्व नवजात को मिली नई जिंदगी

दुर्ग। दुर्ग जिला अस्पताल के विशेष नवजात शिशु देखभाल कक्ष (एसएनसीयू) ने एक बार फिर चिकित्सा क्षेत्र में उल्लेखनीय सफलता हासिल की है। छठे माह में जन्मे महज 720 ग्राम वजन के अति-समयपूर्व नवजात ने दो महीने से अधिक समय तक चले गहन उपचार के बाद जिंदगी की जंग जीत ली। स्वस्थ होने के बाद अब उसका वजन बढ़कर 1.4 किलोग्राम हो गया है और उसे अस्पताल से छुट्टी दे दी गई है।

यह नवजात दुर्ग जिले के कुठरेल ग्राम निवासी पल्लवी साहू और अतुल साहू का पुत्र है। जन्म के समय उसकी हालत बेहद गंभीर थी और उसे सांस लेने में भारी परेशानी हो रही थी। ऐसे में जन्म के तुरंत बाद उसे जिला अस्पताल के एसएनसीयू में भर्ती कर विशेषज्ञ चिकित्सकों की निगरानी में उपचार शुरू किया गया।

एसएनसीयू में पदस्थ शिशु रोग विशेषज्ञ डॉ. वाई. किरण कुमार ने नवजात के फेफड़ों को बेहतर कार्य करने में मदद के लिए शुरुआती समय में ही सर्फेक्टेंट थेरेपी दी और उसे वेंटिलेटर सपोर्ट पर रखा। पूरे उपचार की निगरानी एसएनसीयू नोडल अधिकारी एवं विभागाध्यक्ष डॉ. आर.के. मल्होत्रा तथा डॉ. वाई. किरण कुमार के नेतृत्व में की गई।

इलाज के दौरान नवजात को आवश्यकता के अनुसार उच्च श्रेणी की एंटीबायोटिक्स, कैफीन थेरेपी, सीपीएपी सपोर्ट और कई बार पीआरबीसी रक्त चढ़ाया गया। उपचार के दौरान समयपूर्व जन्म लेने वाले बच्चों में होने वाली आंखों की गंभीर समस्या रेटिनोपैथी ऑफ प्रीमैच्योरिटी (आरओपी) भी विकसित हुई, जिसके बाद चिकित्सकों ने समय रहते एंटी-वीईजीएफ इंजेक्शन देकर सफल उपचार किया।

इस जटिल उपचार में डॉ. आशीष साहू, डॉ. पूजा पांडे, डीएनबी रेजिडेंट डॉ. हेमंत, डॉ. सौरभ, एसएनसीयू सिस्टर इंचार्ज कीर्ति निर्मलकर, नर्सिंग स्टाफ और वार्ड सहायिकाओं ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। चिकित्सकों ने बताया कि इतने कम वजन वाले समयपूर्व नवजातों के उपचार में कंगारू मदर केयर (केएमसी) बेहद प्रभावी होती है। मां पल्लवी साहू ने नियमित रूप से केएमसी अपनाई और डॉक्टरों के हर निर्देश का पालन किया, जिससे नवजात के तेजी से स्वस्थ होने में महत्वपूर्ण मदद मिली।

डॉक्टरों के अनुसार यह सफलता आधुनिक चिकित्सा, समय पर उपचार, प्रशिक्षित स्वास्थ्यकर्मियों की टीम और मां की निरंतर देखभाल का परिणाम है। अस्पताल प्रशासन ने इसे जिला अस्पताल की एसएनसीयू टीम की बड़ी उपलब्धि बताया है।