स्वास्थ्य कर्मचारी संघ का प्रदर्शन, बर्खास्त संविदा कर्मियों की बहाली की मांग तेज

दुर्ग जिला अस्पताल और CMHO कार्यालय के बाहर सांकेतिक विरोध, उच्चस्तरीय जांच की उठी मांग

स्वास्थ्य कर्मचारी संघ का प्रदर्शन, बर्खास्त संविदा कर्मियों की बहाली की मांग तेज

दुर्ग। छत्तीसगढ़ प्रदेश स्वास्थ्य कर्मचारी संघ, जिला शाखा दुर्ग ने सेवा से बर्खास्त किए गए संविदा लैब टेक्नीशियन एवं संविदा स्टाफ नर्सों की बहाली की मांग को लेकर गुरुवार को जिला चिकित्सालय दुर्ग और मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (CMHO) कार्यालय के बाहर भोजन अवकाश के दौरान सांकेतिक प्रदर्शन किया। प्रदर्शन के दौरान कर्मचारियों ने नारेबाजी कर प्रशासन का ध्यान आकर्षित किया और बर्खास्त कर्मचारियों को तत्काल सेवा में वापस लेने की मांग की। प्रदर्शन का नेतृत्व जिला अध्यक्ष सत्येंद्र गुप्ता, संभागीय अध्यक्ष अजय नायक, प्रदेश महामंत्री सैय्यद असलम, उप प्रांताध्यक्ष प्रमेश पाल तथा जिला अस्पताल संयोजक राघवेंद्र साहू ने किया। इसमें लैब टेक्नीशियन, स्टाफ नर्स, फार्मासिस्ट, स्वास्थ्य पर्यवेक्षक सहित विभिन्न संवर्गों के बड़ी संख्या में स्वास्थ्य कर्मचारी और संघ पदाधिकारी शामिल हुए।

जिला अध्यक्ष सत्येंद्र गुप्ता ने कहा कि बर्खास्त कर्मचारियों के मामले में की गई जांच पर कई सवाल खड़े हो रहे हैं। उन्होंने मांग की कि पूरे प्रकरण की स्वास्थ्य सेवाओं के संचालक स्तर पर निष्पक्ष और पारदर्शी तरीके से दोबारा जांच कराई जाए। उन्होंने कहा कि जांच पूरी होने तक संबंधित कर्मचारियों को सेवा में बहाल किया जाना चाहिए।

प्रदेश महामंत्री सैय्यद असलम ने कहा कि जिन कर्मचारियों पर कार्रवाई की गई, उन्होंने घटना वाले दिन भी अपनी जिम्मेदारी निभाते हुए ब्लड बैंक से तीन मरीजों को रक्त उपलब्ध कराया था, जिससे उनकी जान बच सकी। उन्होंने कहा कि यदि कर्मचारी अपने कर्तव्य के प्रति संवेदनशील नहीं होते तो ऐसा संभव नहीं था। उनके अनुसार पूरे मामले में ब्लड बैंक की तकनीकी प्रक्रिया और प्रोटोकॉल को समझे बिना कार्रवाई की गई है, जिसकी निष्पक्ष समीक्षा आवश्यक है। उप प्रांताध्यक्ष प्रमेश पाल ने आरोप लगाया कि जांच प्रक्रिया में पारदर्शिता नहीं बरती गई और कर्मचारियों का पक्ष भी पूरी तरह नहीं सुना गया। वहीं संभागीय अध्यक्ष अजय नायक ने कहा कि जिला अस्पताल, लाल बहादुर शास्त्री अस्पताल सुपेला, मेडिकल कॉलेज तथा अन्य स्वास्थ्य संस्थानों में होने वाली घटनाओं की जिम्मेदारी तय करते समय सभी स्तरों के अधिकारियों और कर्मचारियों की भूमिका की समान रूप से जांच होनी चाहिए। केवल तृतीय और चतुर्थ श्रेणी के कर्मचारियों पर कार्रवाई करना उचित नहीं है।

स्वास्थ्य कर्मचारी संघ ने मांग की कि पूरे मामले की जांच मेडिकल कॉलेज प्रबंधन और संचालक स्वास्थ्य सेवाओं के स्तर से कराई जाए तथा बर्खास्त किए गए सभी स्वास्थ्य कर्मचारियों को तत्काल सेवा में बहाल किया जाए। संघ ने चेतावनी दी कि यदि उनकी मांगों पर शीघ्र निर्णय नहीं लिया गया तो आंदोलन को और व्यापक रूप दिया जाएगा।

प्रदर्शन में अस्पताल संयोजक राघवेंद्र साहू, नर्सिंग प्रकोष्ठ अध्यक्ष मंजू राय, जिला सचिव खिलावन चंद्राकर, महामंत्री लक्ष्मीकांत धोटे, भूपेश उपाध्याय, रोशन सिंह, धनीराम ठाकुर, प्रेम तुरकाने, बोरकार मैडम सहित बड़ी संख्या में लैब टेक्नीशियन, स्टाफ नर्स और अन्य स्वास्थ्य कर्मचारी उपस्थित थे।