जहरीला घी और नकली हल्दी का खेल बेनकाब, दो राज्यों में छापेमारी से बड़ा खुलासा

नई दिल्ली/अहमदाबाद/कानपुर। देश में खाद्य मिलावट के दो बड़े मामलों ने उपभोक्ताओं की चिंता बढ़ा दी है। गुजरात में कथित नकली देशी घी बनाने वाली फैक्ट्री पर कार्रवाई की गई है, जबकि उत्तर प्रदेश के कानपुर में चावल के टूटे हुए दानों से नकली हल्दी पाउडर तैयार किए जाने का मामला सामने आया है। दोनों मामलों की जांच जारी है और खाद्य सुरक्षा एजेंसियां पूरे नेटवर्क की पड़ताल कर रही हैं।
गुजरात में खाद्य सुरक्षा विभाग की कार्रवाई के दौरान एक ऐसी फैक्ट्री का खुलासा हुआ, जहां कथित तौर पर पामोलिन ऑयल और अन्य रसायनों की मदद से देशी घी जैसा उत्पाद तैयार किया जा रहा था। छापेमारी के दौरान बड़ी मात्रा में कथित नकली घी और घी बनाने में इस्तेमाल होने वाला कच्चा माल बरामद किया गया। जांच एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि इस उत्पाद की सप्लाई किन-किन राज्यों और बाजारों तक की जा रही थी।
प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, कथित नकली घी अलग-अलग ब्रांडों के नाम से बाजार में बेचा जा रहा था। बरामद नमूनों को जांच के लिए प्रयोगशाला भेजा गया है, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि इसमें किन पदार्थों का इस्तेमाल किया गया और यह स्वास्थ्य के लिए कितना हानिकारक हो सकता है।
उधर उत्तर प्रदेश के कानपुर में खाद्य विभाग ने पीतांबरा इंटरप्राइजेज नाम की मसाला फैक्ट्री पर छापेमारी की। जांच में आरोप है कि चावल के टूटे हुए दानों में कृत्रिम रंग मिलाकर नकली हल्दी पाउडर तैयार किया जा रहा था। अधिकारियों के अनुसार फैक्ट्री से 77 बोरी चावल के टुकड़े, 42 बोरी कथित नकली हल्दी पाउडर, मिर्च और धनिया पाउडर के साथ लिक्विड कलर भी बरामद किया गया। जब्त माल की अनुमानित कीमत करीब 8 लाख रुपये बताई जा रही है। खाद्य विभाग ने पूरे स्टॉक को जब्त कर लिया है और नमूनों को जांच के लिए भेज दिया है। अधिकारियों का कहना है कि रिपोर्ट आने के बाद संबंधित लोगों के खिलाफ खाद्य सुरक्षा कानून के तहत आगे की कार्रवाई की जाएगी। दो अलग-अलग राज्यों में सामने आए इन मामलों ने एक बार फिर खाद्य सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि मिलावटी घी, मसाले और अन्य खाद्य पदार्थों का लंबे समय तक सेवन स्वास्थ्य के लिए नुकसानदायक हो सकता है। ऐसे में उपभोक्ताओं को केवल विश्वसनीय दुकानों और प्रमाणित ब्रांडों से ही खाद्य सामग्री खरीदनी चाहिए। फिलहाल दोनों मामलों में जांच जारी है। जांच पूरी होने के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि इन कथित मिलावटखोरी के नेटवर्क में और कौन-कौन लोग शामिल हैं तथा किन-किन राज्यों तक इनकी सप्लाई पहुंची थी।
