नक्सलियों ने की युद्ध विराम की मांग, शांतिवार्ता के लिए जारी किया पत्र

नक्सलियों ने की युद्ध विराम की मांग, शांतिवार्ता के लिए जारी किया पत्र

जगदलपुर। छत्तीसगढ़ के वनांचल क्षेत्र में लगातार नक्सलियों को हो रहे नुकसान के बाद अब माओवादियों ने विराम की मांग की है। नक्सलियों ने एक कथित पत्र भी जारी किया है। जिसमें उन्होंने कहा कि सरकार यदि ऑपरेशन बंद करने का घोषणा करती है तो नक्सली भी युद्ध विराम को तैयार हैं।

जानकारी के मुताबिक इस पत्र को नक्सलियों के सेंट्रल कमेटी के प्रवक्ता अभय ने जारी किया है। केंद्रीय कमेटी ने तेलगू भाषा में ये पत्र जारी किया है। क्योंकि जिस तरह से सिलसिलेवार मुठभेड़ों में एक के बाद एक बड़ी तादाद में नक्सली संगठन को झटका लग रहा है और जवानों के साथ मुठभेड़ में कही न कहीं नाकाम नजर आ रहे हैं। इस वजह से ये पत्र जारी किया गया है। इस पत्र में स्पष्ट तौर पर देखा जाए तो नक्सलियों ने शांति वार्ता की बात कही है। हालांकि उनकी तरफ से कोई भी तरह से शर्त नहीं है। बस शांति स्थापित हो इसलिए ये पत्र जारी किया गया है।

नक्सलियों ने पत्र जारी कर यह कहा है ?

  • सीपीआई (माओवादी) केंद्रीय समिति ने मध्य भारत में युद्ध को तत्काल रोकने का आह्वान किया है।
  • वे शांति वार्ता को सुगम बनाने के लिए भारत सरकार और सीपीआई (माओवादी) दोनों से बिना शर्त युद्ध विराम की मांग करते हैं।
  • सरकार का माओवादी विरोधी अभियान (‘कागर’ ऑपरेशन)
  • भाजपा के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार ने राज्य सरकारों के साथ मिलकर माओवादी-प्रभावित क्षेत्रों को लक्षित करते हुए ‘कागर’ नामक एक गहन आतंकवाद विरोधी अभियान शुरू किया।
  • इस अभियान के परिणामस्वरूप बड़े पैमाने पर हिंसा, हत्याएं और सामूहिक गिरफ्तारियां हुई हैं।
  • हताहतों की संख्या और मानवाधिकार उल्लंघन
  • 400 से अधिक माओवादी नेता, कार्यकर्ता और आदिवासी नागरिक कथित तौर पर मारे गए हैं।
  •  महिला माओवादियों को कथित तौर पर सामूहिक यौन हिंसा और फांसी का सामना करना पड़ा है।
  • कई नागरिकों को गिरफ्तार किया गया है और उन्हें अवैध हिरासत और यातना दी गई है।
  • शांति वार्ता के लिए माओवादियों की शर्तें 
  • प्रभावित आदिवासी क्षेत्रों से सुरक्षा बलों की तत्काल वापसी।
  • नई सैन्य तैनाती का अंत।
  • आतंकवाद विरोधी अभियानों का निलंबन।

सरकार के खिलाफ आरोप

• सरकार पर क्रांतिकारी आंदोलनों को दबाने के लिए आदिवासी समुदायों के खिलाफ “नरसंहार युद्ध” छेड़ने का आरोप है।

• नागरिक क्षेत्रों में सैन्य बलों के उपयोग को असंवैधानिक बताया जाता है।

सीपीआई (माओवादी) ने जनता से समर्थन मांगा

  • माओवादियों ने बुद्धिजीवियों, मानवाधिकार संगठनों, पत्रकारों, छात्रों और पर्यावरण कार्यकर्ताओं से शांति वार्ता के लिए सरकार पर दबाव बनाने का आग्रह किया।
    वार्ता के लिए गति बनाने के लिए राष्ट्रव्यापी अभियान चलाने का अनुरोध किया गया।
    शांति वार्ता के लिए माओवादियों की तत्परता
    अगर सरकार उनकी पूर्व शर्तों पर सहमत होती है तो वे बातचीत में शामिल होने की इच्छा व्यक्त करते हैं।
    सीपीआई (माओवादी) ने कहा कि जैसे ही सरकार सैन्य अभियान बंद करेगी, वे युद्ध विराम की घोषणा करेंगे।