12 बंधुआ मजदूर मुक्त, 3 की मौत का आरोप, पिटबुल के डर और थर्ड डिग्री टॉर्चर से सालों तक कैद में रहे मजदूर

फैक्ट्री से छुड़ाए गए मजदूरों ने सुनाई दहला देने वाली कहानी

12 बंधुआ मजदूर मुक्त, 3 की मौत का आरोप, पिटबुल के डर और थर्ड डिग्री टॉर्चर से सालों तक कैद में रहे मजदूर

उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर जिले में मानवता को शर्मसार कर देने वाला मामला सामने आया है। यहां एक दोना निर्माण फैक्ट्री में 12 मजदूरों को कथित तौर पर बंधक बनाकर रखा गया था। पुलिस ने छापेमारी कर सभी मजदूरों को मुक्त कराया है। मजदूरों का आरोप है कि उन्हें 12 हजार रुपये मासिक वेतन, दिन में तीन बार चाय और अच्छे भोजन का लालच देकर फैक्ट्री में लाया गया था, लेकिन बाद में उन्हें बंधुआ मजदूर बनाकर रखा गया। छुड़ाए गए मज़दूरों में उत्तर प्रदेश, बिहार, उत्तराखंड, छत्तीसगढ़, हरियाणा, राजस्थान और नेपाल तक के लोग शामिल हैं।

मुक्त कराए गए मजदूरों ने बताया कि फैक्ट्री में उनसे दिन-रात काम कराया जाता था। काम खत्म होने के बाद उन्हें एक कमरे में बंद कर दिया जाता था। मजदूरों को दिन में सिर्फ एक बार भोजन दिया जाता था, जिसमें चोकर की रोटी, नमक और हरी मिर्च शामिल होती थी। कई मजदूरों के शरीर पर गंभीर चोटों के निशान मिले हैं। एक पीड़ित ने आरोप लगाया कि फैक्ट्री मालिक ने बेल्ट से पीटकर उसका कान तक काट दिया था। पुलिस जांच में यह भी सामने आया है कि फैक्ट्री परिसर में दो पिटबुल कुत्ते खुले छोड़े गए थे ताकि मजदूर भागने की हिम्मत न कर सकें। मजदूरों के मोबाइल फोन, आधार कार्ड और अन्य दस्तावेज भी जब्त कर लिए गए थे। बताया जा रहा है कि फैक्ट्री संचालक अंकित बालियान किसी कार्यक्रम में शहर से बाहर गया था। इसी दौरान एक मजदूर किसी तरह वहां से भाग निकला और बाहर लोगों को अपनी आपबीती सुनाई। सूचना मिलने पर पुलिस ने कार्रवाई करते हुए 12 मजदूरों को मुक्त कराया।

पुलिस को संदेह है कि फैक्ट्री में थर्ड डिग्री यातनाओं के कारण तीन मजदूरों की मौत भी हुई है। इनमें से एक मृतक की पहचान हो चुकी है। मामले की गंभीरता को देखते हुए एसआईटी गठित कर जांच शुरू कर दी गई है। पुलिस ने आरोपी शिवा त्यागी और प्रदीप बालियान को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है, जबकि मुख्य आरोपी अंकित बालियान अभी फरार है। उसकी गिरफ्तारी के लिए दो विशेष टीमें गठित की गई हैं। मुक्त कराए गए मजदूरों को पुनर्वास योजना के तहत 30-30 हजार रुपये की सहायता राशि प्रदान कर उनके परिजनों के साथ घर भेजा गया है। अधिकारियों के अनुसार, मामले का अंतिम निर्णय होने के बाद वयस्क मजदूरों को 70 हजार रुपये और नाबालिगों को 1.70 लाख रुपये तक की अतिरिक्त सहायता दी जाएगी।