भिलाई की बेटियों के हुनर को देखने पहुंची नीति आयोग-यूनिसेफ की टीम, वैशालीनगर की छात्राओं के मॉडल देख प्रभावित हुई राष्ट्रीय टीम

छात्राओं ने अपनी सफलता का श्रेय प्राचार्य संगीता सिंह बघेल और शिक्षकों के सहयोग को दिया

भिलाई की बेटियों के हुनर को देखने पहुंची नीति आयोग-यूनिसेफ की टीम, वैशालीनगर की छात्राओं के मॉडल देख प्रभावित हुई राष्ट्रीय टीम

भिलाई। प्रतिभा संसाधनों की मोहताज नहीं होती, जरूरत होती है सही मार्गदर्शन और अवसर की। भिलाई के वैशालीनगर कन्या उच्चतर माध्यमिक विद्यालय की छात्राएं इसी बात को साबित कर रही हैं। यहां पढ़ने वाली छात्राएं विज्ञान और तकनीक के क्षेत्र में नए प्रयोग कर रही हैं। उनके इसी हुनर को करीब से देखने और समझने के लिए नीति आयोग और यूनिसेफ की 20 सदस्यीय टीम विद्यालय पहुंची। टीम ने अटल टिंकरिंग लैब का निरीक्षण किया और छात्राओं से उनके बनाए मॉडल तथा वैज्ञानिक प्रयोगों पर चर्चा की।

निरीक्षण के दौरान छात्राओं ने टीम के सदस्यों को अपने-अपने मॉडल का डेमो दिया। उन्होंने बताया कि मॉडल किस तरह काम करते हैं और किन समस्याओं का समाधान करने में उपयोगी हो सकते हैं। टीम के सदस्यों ने छात्राओं की कार्यशैली, उनके विचारों और प्रयोग करने के तरीके को समझा। सरकारी विद्यालय की छात्राओं में विज्ञान के प्रति रुचि और नवाचार की क्षमता देखकर टीम ने विद्यालय के प्रयासों की सराहना की।

राष्ट्रपति से सम्मानित हो चुकी हैं स्कूल की छात्रा

वैशालीनगर कन्या उच्चतर माध्यमिक विद्यालय की उपलब्धियों में छात्रा कविता साहू और अंजलि का नाम खास है। कविता राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से सम्मानित हो चुकी हैं। छात्रा कविता साहू और अंजलि द्वारा तैयार किए गए एक प्रोजेक्ट को राष्ट्रीय स्तर पर स्थान मिला था। इन उपलब्धियों ने विद्यालय की छात्राओं के वैज्ञानिक प्रयासों को नई पहचान दी है।

विद्यालय की छात्राएं केवल मॉडल तैयार करने तक सीमित नहीं हैं, बल्कि वास्तविक समस्याओं को समझकर उनके समाधान खोजने की दिशा में भी काम कर रही हैं। अटल टिंकरिंग लैब उन्हें अपने विचारों को प्रयोग के जरिए परखने और उन्हें दूसरों के सामने प्रस्तुत करने का अवसर दे रही है।

अलग-अलग राज्यों से पहुंचे टीम के सदस्य

यूनिसेफ के छत्तीसगढ़-मध्यप्रदेश संचार विशेषज्ञ अनिल गुलाटी ने बताया कि टीम में दिल्ली, महाराष्ट्र, तमिलनाडु, केरल, अहमदाबाद और लखनऊ सहित विभिन्न स्थानों के सदस्य शामिल थे। टीम यह देखने आई थी कि लैब में छात्राएं किस तरह काम करती हैं, किस प्रकार के मॉडल बनाती हैं और इन गतिविधियों के माध्यम से क्या सीख रही हैं।

अनिल गुलाटी ने विद्यालय में हो रहे नवाचार की प्रशंसा करते हुए प्राचार्य संगीता सिंह बघेल और शिक्षकों के योगदान की सराहना की। उन्होंने कहा कि यहां की छात्राएं नए विचारों पर काम कर रही हैं और उन्हें मॉडल के रूप में विकसित करने का प्रयास कर रही हैं।

2019 में शुरू हुई थी अटल टिंकरिंग लैब

विद्यालय की रसायन शास्त्र की व्याख्याता और अटल टिंकरिंग लैब की प्रभारी रितु हांडा ने बताया कि विद्यालय में वर्ष 2019 में लैब की शुरुआत हुई थी। प्राचार्य संगीता सिंह बघेल के मार्गदर्शन में छात्राएं लगातार नए मॉडल तैयार करती रही हैं।

उन्होंने बताया कि वर्ष 2024 में यूनिसेफ की टीम विद्यालय आई थी। उस दौरान मिले एक विचार पर छात्राओं ने मॉडल तैयार किया, जिसका चयन राष्ट्रीय स्तर पर हुआ। उन्होंने कहा कि विद्यालय की छात्राएं मेहनत से काम करती हैं और किसी समस्या का समाधान खोजने की कोशिश करती हैं।

शिक्षक और छात्राएं मिलकर कर रहे काम

दुर्ग की एडीपीओ हेमलता बंजारे ने कहा कि अटल टिंकरिंग लैब के माध्यम से बच्चों की छिपी प्रतिभा को सामने आने का अवसर मिलता है। यहां शिक्षक और छात्राएं मिलकर एक टीम की तरह काम करते हैं। सरकारी स्कूलों के बच्चों को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान मिलना गर्व की बात है।

विद्यालय की छात्राओं ने अपनी सफलता का श्रेय प्राचार्य संगीता सिंह बघेल और शिक्षकों के सहयोग को दिया। उनका कहना है कि प्राचार्य का प्रयास रहा है कि सरकारी स्कूल में पढ़ने वाली छात्राएं सुविधाओं और अवसरों से वंचित न रहें।