112 साल का इंतजार खत्म, रावघाट पहुंची पहली पैसेंजर ट्रेन
रायपुर से बस्तर के दुर्गम इलाके तक रेल कनेक्टिविटी का नया अध्याय, रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने वर्चुअली किया लोकार्पण, मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने बताया ऐतिहासिक उपलब्धि।

रायपुर। छत्तीसगढ़ के रेल इतिहास में 20 अक्टूबर 2026 का दिन ऐतिहासिक उपलब्धि के रूप में दर्ज हुआ। एक सदी से अधिक समय से रेल कनेक्टिविटी का इंतजार कर रहे बस्तर अंचल के रावघाट तक पहली पैसेंजर ट्रेन सेवा शुरू हो गई। ताड़ोकी-रावघाट रेलखंड पर परिचालन शुरू होने से अब इस दुर्गम क्षेत्र के यात्रियों को रायपुर तक रेल मार्ग से पहुंचने की सुविधा मिलेगी। रेल सेवा की शुरुआत को क्षेत्र में आवागमन बढ़ाने और विकास की नई संभावनाओं के द्वार खोलने वाला कदम माना जा रहा है।
रेल मंत्री ने वर्चुअली किया लोकार्पण
नई रेल सेवा का शुभारंभ केंद्रीय रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से किया। रायपुर रेलवे स्टेशन पर आयोजित मुख्य समारोह में मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय सहित कई जनप्रतिनिधि मौजूद रहे। उद्घाटन के दौरान ट्रेन को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया गया। रावघाट तक यात्री ट्रेन पहुंचने से लंबे समय से रेल सुविधा की प्रतीक्षा कर रहे क्षेत्र के लोगों में नई उम्मीद जगी है।
रायपुर से रावघाट तक चलेगी पैसेंजर ट्रेन
ताड़ोकी और रायपुर के बीच पहले से संचालित पैसेंजर ट्रेन सेवा का विस्तार अब रावघाट तक कर दिया गया है। निर्धारित समय-सारिणी के अनुसार, ट्रेन रायपुर से दोपहर 1:20 बजे रवाना होकर दोपहर 2:30 बजे दुर्ग पहुंचेगी। दुर्ग से दोपहर 2:40 बजे प्रस्थान कर ट्रेन शाम 7 बजे रावघाट पहुंचेगी।
वापसी सेवा के संबंध में उपलब्ध जानकारी के अनुसार, रावघाट से चलने वाली ट्रेन सुबह 11:40 बजे रायपुर पहुंचेगी। नई सेवा से बस्तर के दूरस्थ इलाके के यात्रियों को राजधानी तक आने-जाने में सुविधा मिलने की उम्मीद है।
महिला लोको पायलट प्रतिभा बंसोड़ ने संभाली कमान
उद्घाटन दिवस पर ट्रेन की कमान महिला लोको पायलट प्रतिभा बंसोड़ ने संभाली। इस उपलब्धि ने समारोह को खास बना दिया। रावघाट तक रेल परिचालन शुरू होना केवल परिवहन सुविधा का विस्तार नहीं, बल्कि दूरस्थ क्षेत्रों को प्रदेश के प्रमुख शहरों से जोड़ने की दिशा में भी महत्वपूर्ण कदम है।
1914 में हुआ था पहला सर्वे, 1,628 करोड़ रुपये की लागत
रावघाट रेललाइन का इतिहास एक सदी से भी अधिक पुराना है। वर्ष 1914 में अंग्रेजों के शासनकाल के दौरान इस क्षेत्र तक रेललाइन पहुंचाने के लिए पहला सर्वे किया गया था। हालांकि, परियोजना को धरातल पर उतरने में लंबा समय लगा।
दल्लीराजहरा से रावघाट के बीच करीब 95 किलोमीटर लंबी रेललाइन का निर्माण लगभग 1,628 करोड़ रुपये की लागत से किया गया है। इसमें ताड़ोकी से रावघाट के बीच का 17.5 किलोमीटर लंबा अंतिम खंड भी शामिल है। इस खंड पर यात्री सेवा शुरू होने से रेल संपर्क का दायरा और विस्तृत हुआ है।
नक्सल प्रभावित क्षेत्र में चुनौतियों के बीच निर्माण
रेललाइन का बड़ा हिस्सा दुर्गम और नक्सल प्रभावित क्षेत्र से होकर गुजरता है। निर्माण के दौरान सुरक्षा और कठिन भौगोलिक परिस्थितियां बड़ी चुनौती रहीं। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, नक्सली खतरे को देखते हुए हर पांच किलोमीटर पर सुरक्षा कैंप बनाए गए थे। सुरक्षा कारणों से निर्माण कार्य के लिए प्रतिदिन केवल पांच से छह घंटे का समय मिल पाता था।
इन चुनौतियों के बावजूद रेलखंड का पूरा होना क्षेत्र में बुनियादी ढांचे के विस्तार की दिशा में महत्वपूर्ण उपलब्धि है।
अभनपुर-कुरूद रेलखंड पर भी शुरू हुई नई सुविधा
रायपुर में आयोजित समारोह के दौरान अभनपुर-कुरूद ब्रॉडगेज लाइन और रायपुर-कुरूद यात्री मेमू सेवा का भी शुभारंभ किया गया। इन सेवाओं से संबंधित क्षेत्रों के यात्रियों को रेल परिवहन का अतिरिक्त विकल्प मिलने की उम्मीद है।
विकास, रोजगार और व्यापार को मिल सकती है गति
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने रावघाट तक ट्रेन सेवा शुरू होने को दक्षिण छत्तीसगढ़ की विकास यात्रा का नया ऐतिहासिक अध्याय बताया। उन्होंने कहा कि रावघाट तक रेल की सीटी गूंजना केवल नई यात्रा की शुरुआत नहीं, बल्कि बस्तर अंचल में विकास, जनता के विश्वास और नई संभावनाओं के नए युग का प्रारंभ है।
मुख्यमंत्री के मुताबिक, दूरस्थ और आदिवासी क्षेत्रों तक रेललाइन पहुंचने से लोगों को शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार और व्यापार से जुड़ी सुविधाओं तक पहुंचने में मदद मिल सकती है। रेल संपर्क बढ़ने से स्थानीय आर्थिक गतिविधियों को भी गति मिलने की संभावना है।










