14 लाख की साइबर ठगी का राज खुला, किराये पर बैंक खाता देने वाला युवक गिरफ्तार

बैंक खाता, एटीएम और सिम कार्ड सौंपकर बना साइबर अपराधियों का सहयोगी, म्यूल अकाउंट में मिले 14.16 लाख रुपए के संदिग्ध ट्रांजेक्शन

14 लाख की साइबर ठगी का राज खुला, किराये पर बैंक खाता देने वाला युवक गिरफ्तार

भिलाई। साइबर अपराधियों को बैंक खाता किराये पर देकर ठगी की रकम के लेन-देन में सहयोग करना एक युवक को भारी पड़ गया। पुरानी भिलाई पुलिस ने साइबर ठगी से जुड़े मामले में एक आरोपी को गिरफ्तार किया है, जिसके बैंक खाते का इस्तेमाल ठगी की रकम को इधर-उधर करने के लिए किया जा रहा था। जांच में खाते में 14 लाख 16 हजार 645 रुपए से अधिक का संदिग्ध ट्रांजेक्शन सामने आया है।

पुलिस के अनुसार भारत सरकार के गृह मंत्रालय द्वारा संचालित समन्वय पोर्टल और पुलिस मुख्यालय से प्राप्त सूचनाओं के आधार पर बैंक खातों की जांच की जा रही थी। इसी दौरान बैंक ऑफ महाराष्ट्र की चिखली शाखा में संचालित एक खाते पर संदेह हुआ। जांच में पता चला कि खाते का उपयोग साइबर ठगी से प्राप्त रकम को प्राप्त करने और अन्य खातों में ट्रांसफर करने के लिए किया जा रहा था। विवेचना के दौरान सामने आया कि खाताधारक आकाश भट्ट (22 वर्ष), निवासी अहिवारा, जिला दुर्ग ने पैसों के लालच में अपना बैंक खाता, पासबुक, एटीएम कार्ड और मोबाइल सिम कार्ड किसी अन्य व्यक्ति को उपलब्ध करा दिया था। इसके बाद उक्त खाते का उपयोग साइबर अपराधियों द्वारा म्यूल अकाउंट के रूप में किया गया।

पुलिस जांच में खाते में करीब 14.16 लाख रुपए के लेन-देन की पुष्टि हुई। अधिकारियों का कहना है कि साइबर ठगी के मामलों में अपराधी अक्सर ऐसे बैंक खातों का उपयोग करते हैं, जिन्हें कमीशन या किराये के बदले लोगों से हासिल किया जाता है। इन खातों के जरिए ठगी की रकम को कई खातों में घुमाकर उसके स्रोत को छिपाने का प्रयास किया जाता है। मामले में थाना पुरानी भिलाई में अपराध क्रमांक 258/2026 दर्ज कर भारतीय न्याय संहिता की धारा 318(2), 318(3) और 318(4) के तहत कार्रवाई की गई है। पुलिस ने आरोपी को गिरफ्तार कर न्यायिक प्रक्रिया शुरू कर दी है। साथ ही यह भी पता लगाया जा रहा है कि खाते का उपयोग करने वाले मुख्य साइबर अपराधी कौन हैं और उनका नेटवर्क कहां तक फैला हुआ है।

पुलिस ने आम नागरिकों से अपील की है कि किसी भी परिस्थिति में अपना बैंक खाता, एटीएम कार्ड, पासबुक, चेकबुक या मोबाइल सिम किसी अन्य व्यक्ति को न दें। ऐसा करना स्वयं को गंभीर कानूनी कार्रवाई और साइबर अपराध में फंसाने जैसा हो सकता है।

पुलिस की चेतावनी

साइबर अपराधी अब सीधे ठगी करने के साथ-साथ बेरोजगार युवाओं और जरूरतमंद लोगों को कमीशन का लालच देकर उनके बैंक खाते किराये पर ले रहे हैं। ऐसे खातों का इस्तेमाल करोड़ों रुपए की ऑनलाइन ठगी, मनी लॉन्ड्रिंग और अन्य साइबर अपराधों में किया जाता है। यदि किसी खाते का उपयोग अपराध में होता है तो खाताधारक भी कानूनी रूप से जिम्मेदार माना जाता है।

जप्त सामग्री

  • बैंक खाते से संबंधित दस्तावेज
  • एटीएम कार्ड
  • मोबाइल सिम कार्ड

आरोपी

आकाश भट्ट (22 वर्ष)
निवासी: अहिवारा, थाना नंदिनी, जिला दुर्ग।