बंधक संपत्ति बेचकर करोड़ों की ठगी का आरोप, नीलामी कार्रवाई के बाद खुला मामला

कोर्ट के आदेश पर दुर्ग कोतवाली में अपराध दर्ज

बंधक संपत्ति बेचकर करोड़ों की ठगी का आरोप, नीलामी कार्रवाई के बाद खुला मामला

दुर्ग। दुर्ग में करोड़ों रुपये की संपत्ति से जुड़ी बड़ी धोखाधड़ी का मामला सामने आया है। कोर्ट के आदेश पर सिटी कोतवाली दुर्ग पुलिस ने बंधक रखी गई संपत्ति को बेचने और दस्तावेजों में कूटरचना करने के आरोप में अपराध दर्ज किया है। मामले में सरिता सिंघल, रोशन जैन सहित कई लोगों को आरोपी बनाया गया है। आरोप है कि नेहरू नगर स्थित एक व्यावसायिक और आवासीय संपत्ति, जो पहले से यूको बैंक में बंधक थी, उसे बिना जानकारी दिए पहले रोशन जैन को और बाद में दूसरे पक्ष को बेच दिया गया। 

शिकायतकर्ताओं पावनी गुप्ता और श्वेता गुप्ता ने कोर्ट में आवेदन देकर बताया कि उन्होंने जुलाई 2024 में करीब 1 करोड़ 91 लाख रुपये में यह संपत्ति खरीदी थी। खरीद के दौरान उन्हें बताया गया कि संपत्ति पूरी तरह भारमुक्त है और उस पर किसी प्रकार का बैंक ऋण नहीं है। बाद में जनवरी 2025 में डीआरटी जबलपुर के आदेश से पता चला कि संपत्ति पर 81 लाख रुपये से अधिक का पुराना बैंक लोन बकाया है और संपत्ति की नीलामी की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। आवेदकों का आरोप है कि संपत्ति से जुड़े दस्तावेजों में कूटरचना कर बैंक अधिकारियों के साथ साठगांठ की गई और करोड़ों रुपये का गलत फायदा उठाया गया। माननीय न्यायालय के आदेश पर सिटी कोतवाली पुलिस ने बीएनएस की धारा 318(4) और 3(5) के तहत अपराध दर्ज कर मामले को विवेचना में लिया है। पुलिस अब बैंक दस्तावेजों, ऋण रिकॉर्ड और संपत्ति से जुड़े सभी लेन-देन की जांच करेगी।

क्या है मामला

आवेदकगण द्वारा दिनांक 09/07/2024 को विक्रेता रोशन जैन पिता ओम प्रकाश जैन से नेहरू नगर स्थित एक आवासीय भूमि क्रय की गई थी, जिसका विवरण निम्नानुसार है - ब्लॉक क्र. 96, भूखण्ड क्र.-03 क्षेत्रफल 15 मीटर x 24 मीटर 300 वर्गमीटर निर्मित क्षेत्रफल भूतल 314.2 वर्गमीटर (दुकान) निर्मित क्षेत्रफल प्रथम तल 273.23 वर्गमीटर (मकान) क्रमशः 2 उपरोक्त संपत्ति को विक्रेता रोचन जैन से राशि 1,91,00,000/-रू. (अक्षरी एक करोड़ इंक्यानवे लाख रूपये) भुगतान कर क्रय किया गया था। 03. यह कि, विक्रेता रोशन जैन के द्वारा आवेदकगण को यह विश्वास दिलाया गया था कि उपरोक्त संपत्ति उनके द्वारा श्रीमती सरिता सिंघल से वर्ष 2018 में क्रय किया गया है, तथा यह भी जानकारी दी थी कि उपरोक्त संपत्ति किसी भी प्रकार से बैंक में या किसी भी वित्तीय संस्थान में चंचन नहीं है, और न ही उस संपत्ति पर कोई ऋण बकाया है। आवेदकगण द्वारा उपरोक्त संपत्ति को रोशन जैन से क्रय करते समय रोशन जैन एवं श्रीमती सरिता सिंपल के मध्य निष्पादित पंजीकृत बयनामा तथा रजिस्ट्री के दस्तावेज अवलोकन किया गया था, जिससे यह दर्शित था कि आवेदकगण द्वारा क्रय की जा रही उपरोक्त संपत्ति किसी भी बैंक में बंधक नहीं है। दस्तावेजों का अवलोकन करने के पश्चात् आवेदकगण ने उपरोक्त संपत्ति विक्रेता रोशन जैन से संपूर्ण राशि अदा कर क्रय की है। 04. यह कि, दिनांक 02/01/2025 को DEBTS RECVERY TRIBUNAL-JABALPUR के द्वारा आदेश पारित किया गया कि आवेदकगण द्वारा क्रय की गई उपरोक्त संपत्ति पर अभियुक्तगण क्र. 01 से 06 के द्वारा लिया गया 81,19,902.17/-रु. का लोन बकाया है, जिसका भुगतान करने में असफल होने के कारण ट्रिब्यूनल के द्वारा उपरोक्त संपत्ति को नीलामी करने का आदेश पारित किया गया है, तथा उक्त भवन नीलाम भी कर दिया गया है। 05. यह कि, यदि किसी भूमि को बैंक में बंधक रखकर ऋण प्राप्त किया जाता है तो, उपरोक्त बंधकशुदा भूमि के मूल दस्तावेज बैंक के आधिपत्य में होते हैं, तथा उपरोक्त दस्तावेजों पर संबंधित बैंक में बंधक रखे जाने का उल्लेख बंधक अवधि में होता है, जबकि उपरोक्त भूमि जब श्रीमती सरिता सिंघल के द्वारा रोशन जैन को विक्रय किया गया था, तब अनावेदकगण क्र. 01 से 06 के द्वारा भूमि से संबंधित दस्तावेजों में कूटरचना करते हुए तथा यूको बैंक के अधिकारियों के साथ षडयंत्र पूर्वक भूमि से संबंधित दस्तावेजों में कूट रचना करते हुए उपरोक्त भूमि को भारमुक्त होना दर्शित किया गया था, जिसके आधार पर क्रेता रोशन जैन के द्वारा उपरोक्त भूमि को क्रय किया गया, जिसके पश्चात् आवेदकगण द्वारा भूमि का सौदा रोशन जैन से किया गया था।

06. यह कि, अनावेदिका क्र. 01 श्रीमती सरिता सिंघल के द्वारा उपरोक्त भूमि टीकम लाल महोबे से वर्ष जुलाई 2005 में 6,00,000/-रू. में क्रय किया गया क्रमशः 3 था, जिसके पश्चात् उपरोक्त भूमि की स्वामी अनावेदिका क्र. 01 श्रीमती सरिता सिंघल रहीं वी, इसी दौरान अनावेदक क्र. 01 से 06 के द्वारा यूको बैंक से उपरोक्त संपत्ति को बंधक रखते हुए ऋण प्राप्त किया गया वा, उपरोक्त ऋण में देनदारी के रूप में श्रीमती सरिता सिंघल एवं उनके विधिक वारिसान गौरव सिंघल, नीरज सिंघल, श्रीमती अनु सिंघल, शुभम सिंघल एवं विनोद कुमार सिंघल जवाबदार वे। 07. यह कि, सितम्बर 2018 में श्रीमती सरिता सिंघल के द्वारा उपरोक्त संपत्ति का विक्रय रोशन जैन के हक में किया गया, तथा उपरोक्त संपत्ति के प्रतिफल स्वरूप 1,60,00,000/-रू. (अशरी एक करोड़ साठ लाख रूपये) प्राप्त किये गये वे, इसी दौरान रोशन जैन के द्वारा उपरोक्त संपत्ति को नगर पालिका निगम दुर्ग फ्री होल्ड किये जाने के पश्चात् राजस्व अभिलेखों में स्वयं के नाम पर दर्ज कराया गया था, चूंकि रोशन जैन के द्वारा उपरोक्त संपत्ति को क्रय करते समय स्टेट बैंक शाखा सेक्टर-01 से ऋण प्राप्त कर श्रीमती सरिता सिंघल को प्रदान किया गया था, तब आवेदकगण के द्वारा उपरोक्त संपत्ति को क्रय करते समय विक्रेता रोशन जैन के द्वारा पूर्व में उपरोक्त संपत्ति को क्रय करने के लिये गये ऋण की राशि का भुगतान करेने के लिए उपरोक्त संपत्ति को बंधक रखते हुए येस बैंक से दिनांक 20/07/2024 को डी.डी. क्रमांक 486219 के माध्यम से 84,03,843/-रू. (चौरासी लाख तीन हजार आठ सौ तिरालीस रूपये) रोशन जैन के द्वारा ऋण लिये गये स्टेट बैंक ऑफ इण्डिया शाखा सेक्टर-01 में राशि अंतिरित की गई थी, जिसके बाद स्टेट बैंक ऑफ इण्डिया शाखा सेक्टर-01 द्वारा जो ड्यूज सर्टिफिकेट जारी किया गया था, इस प्रकार वर्तमान में उपरोक्त संपत्ति का स्वामित्व ऋण अदायगी अवधि तक येस बैंक के अधीन था। 08. यह कि, दिनांक 26/03/2025 को डी.आर.टी. जबलपुर के द्वारा ई नीलामी की घोषणा उपरोक्त संपत्ति के संबंध में की गई थी, तथा यूको बैंक को यह अधिकार प्रदान किया गया था कि वह नीलामी के द्वारा शेष बचे हुए ऋण जो कि अभियुक्त क्र. 01 से 06 के द्वारा उपरोक्त संपत्ति को बंधक रख प्राप्त किया गया था, की वसूली आवेदकगण द्वारा क्रय की गई संपत्ति के माध्यम से करे, इस दौरान चूंकि आवेदकगण द्वारा क्रय की गई संपत्ति येस बैंक के माध्यम से ऋण प्राप्त कर क्रय की गई थी, तब एक लिखित आपत्ति येस बैंक द्वारा उपरोक्त नीलामी के संबंध में दिनांक 22/10/2025 को उपपंजीयक दुर्ग, तहसीलदार भिलाई, स्टेट ऑफिसर म्युनिसिपल कॉपोरेशन, श्रीमती सरिता क्रमश: 4 सिंघल, रोशन जैन एवं आवेदकगण को पत्र प्रेषित कर जानकारी दी गई थी कि उपरोक्त संपत्ति पर वर्तमान में येस बैंक का स्वमित्व है, और यदि भविष्य में उपरोक्त संपत्ति की नीलामी की जाती है तो यह अवैध होगा, इस प्रकार सरिता सिंघल एवं उनके विधिक वारिसानों तथा रोशन जैन के द्वारा यूको बैंक के अधिकारियों से साठगांठ कर संपत्ति के दस्तावेजों की कूटरचना करते हुए यूको बैंक से प्राप्त ऋण अदा किये बिना उपरोक्त संपत्ति रोशन जैन को विक्रय की गई थी जबकि उपरोक्त संपत्ति पहले से ही यूको बैंक के आधीन बधक थी तब उपरोक्त संपत्ति में स्टेट बैंक ऑफ इण्डिया के द्वारा ऋण प्रदान किया जाना संभव नहीं था, तथा उपरोक्त संपत्ति को क्रय करते समय रोशन जैन के द्वारा स्टेट बैंक ऑफ इण्डिया से ऋण प्राप्त किया गया एवं आवेदकगण द्वारा उपरोक्त संपत्ति को क्रय करते समय येस बैंक लिमिटेड से ऋण प्राप्त कर स्टेट बैंक ऑफ इण्डिया में राशि अंतरित की गई थी। 09. यह कि, अनावेदकगण के द्वारा जानबूझकर षडयंत्रपूर्वक बंधकशुदा संपत्ति को विक्रय कर सदोष लाभ अर्जित किया गया है, तथा वर्तमान में उपरोक्त संपत्ति को नीलाम किये जाने का आदेश पारित किया गया है, जिससे आवेदकगण गंभीर आर्थिक क्षति कारित हुई है। अनावेदकगण के द्वारा उपरोक्त संपत्ति को बंधक रखकर 81,19,902.17/-रू. का ऋण प्राप्त किया गया है, एवं उस संपत्ति को रोशन जैन को विक्रय कर 1,60,00,000/-रू. प्राप्त किया गया है, एवं रोशन जैन ने यह जानकारी होने के पश्चात् भी कि उपरोक्त भूमि बंधक है, आवेदकगण को विक्रय कर दी, इस प्रकार अनावेदकगण /अभियुक्तगण एवं यूको बैंक के कर्मचारियों एवं अधिकारियों के द्वारा षडयंत्रपूर्वक 2,41,19,902/- रू. का सदोष लाभ अर्जित किया गया है। आवेदकगण द्वारा उपरोक्त संपत्ति का पंजीयन थाना-दुर्ग के क्षेत्राधिकार के अंतर्गत किया गया है, इसलिए यह आवेदन पत्र माननीय न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत है। 10. यह कि, अभियुक्तगण द्वारा कारित कृत्य जिससे कि आवेदकगण को गंभीर आर्थिक क्षति कारित की गई है, तथा आवेदकगणों से झूठी प्रवंचना करते हुए राशि प्राप्त की गई है, उपरोक्त खातों की जांच तथा बैंक से संबंधित दस्तावेजों की जांच सक्षम प्राधिकारी के द्वारा कराया जाना संभव है, ऐसी स्थिति में थाना क्रमशः 5 प्रभारी, थाना-दुर्ग कोतवाली को आवेदकगण / अभियुक्तगण के विरुद्ध अपराच पंजीबद्ध कर अनुसंधान किये जाने का निर्देश दिया जाना व्यायहित में उचित होगा। 11. यह कि यह आवेदन पत्र माननीय न्यायालय के समक्ष विहित समय अवधि के भीतर, शपथ पत्र संलग्न कर तथा उचित न्यायशुल्क चरिपत कर प्रस्तुत किया गया है। 12. यह कि, अभियुक्तगण के विरूद्ध वाना-दुर्ग कोतवाली पुलिस के समक्ष दिनांक 21/12/2025 को लिखित शिकायत प्रस्तुत की गई थी जिस पर कोई कार्यवाही नहीं होने पर अभियुक्तगण के विरूद्ध श्रीमान पुलिस अधीक्षक महोदय के समक्ष दिनांक 19/01/2026 को लिखित आवेदन पत्र स्वयं उपस्थित होकर तथा पंजीकृत डाक के माध्यम से प्रेषित किया गया था जिस पर भी वर्तमान समय तक कोई कार्यवाही नहीं होने तथा अभियुक्तगण के विरुद्ध अपराध पंजीबद्ध नहीं होने से व्यथित होकर यह आवेदन पत्र माननीय न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत है । 13. यह कि यह आवेदन पत्र माननीय न्यायालय के समक्ष स‌द्भावनापूर्वक प्रस्तुत है। अतः माननीय न्यायालय से निवेदन है कि आवेदकगण की ओर से प्रस्तुत आवेदन पत्र स्वीकार कर थाना प्रभारी, थाना दुर्ग कोतवाली को अभियुक्तगण के विरुद्ध अंतर्गत धारा 61, 318, 320, 337, 338, 339, 340, 3(5) भारतीय न्याय संहिता में अपराध पंजीबद्ध कर, विवेचना किये जाने का आदेश पारित करने की कृपा करें।