हजार कंठों में गूंजा गुरुदेव का स्वर, “चिरनूतन” ने रचा सांस्कृतिक इतिहास

भिलाई। गुरुदेव रविन्द्र नाथ टैगोर की 165वीं जयंती पर रविवार शाम महात्मा गांधी कला मंदिर, सिविक सेंटर में आयोजित “चिरनूतन” कार्यक्रम श्रद्धा, संगीत और सांस्कृतिक उमंग का अद्भुत संगम बन गया। “रविन्द्र सुधा, भिलाई” द्वारा आयोजित इस ऐतिहासिक प्रस्तुति ने पूरे सभागार को रवीन्द्र संगीत की मधुर स्वर लहरियों से भावविभोर कर दिया।

देश के 11 राज्यों के 11 प्रेक्षागृहों में चयनित विशिष्ट संस्थाओं द्वारा एक साथ आयोजित “शतकंठे सम्मेलनक रवीन्द्र संगीत” में 1000 से अधिक कलाकारों ने सामूहिक स्वरांजलि अर्पित कर एक नया सांस्कृतिक इतिहास रच दिया। भिलाई सहित विभिन्न राज्यों के कलाकारों द्वारा प्रस्तुत रवीन्द्र संगीत ने वातावरण को पूरी तरह गुरुदेवमय बना दिया। सभागार में उपस्थित दर्शकों ने इस अनुपम प्रस्तुति को मंत्रमुग्ध होकर सुना और तालियों की गूंज से कलाकारों का उत्साहवर्धन किया।

कार्यक्रम का विशेष आकर्षण बड़े स्क्रीन पर देशभर के विभिन्न प्रेक्षागृहों से हो रहा लाइव प्रसारण रहा, जिसके माध्यम से दर्शकों ने एक साथ अनेक राज्यों की प्रस्तुतियों का आनंद लिया। संगीत की इस राष्ट्रीय श्रृंखला ने “एक भारत, श्रेष्ठ भारत” की सांस्कृतिक भावना को जीवंत कर दिया।

इस ऐतिहासिक आयोजन की संकल्पना एवं संगीत निर्देशन कोलकाता की सुप्रसिद्ध संगीत साधिका अरुंधती देब द्वारा किया गया। वहीं “रविन्द्र सुधा, भिलाई” के निर्देशक श्री विश्वजीत सरकार एवं श्रीमती संचयिता राय के लगभग एक वर्ष के सतत प्रशिक्षण, अनुशासन और समर्पण ने प्रस्तुति को विशेष ऊंचाई प्रदान की।

कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में श्री पवन कुमार, कार्यपालक निदेशक (मानव संसाधन), भिलाई इस्पात संयंत्र तथा विशिष्ट अतिथि श्री प्रबीर कुमार सरकार, कार्यपालक निदेशक (प्रोजेक्ट), भिलाई इस्पात संयंत्र एवं श्री मानस विश्वास (सेवा निवृत्ति कार्यपालक निर्देशक) उपस्थित रहे। अतिथियों ने आयोजन की भव्यता, अनुशासन और सांस्कृतिक गरिमा की सराहना करते हुए इसे भिलाई के सांस्कृतिक इतिहास का गौरवपूर्ण अध्याय बताया।
पूरे आयोजन के दौरान सभागार में श्रद्धा, संगीत और सांस्कृतिक चेतना का अद्भुत वातावरण बना रहा। कार्यक्रम के समापन पर उपस्थित कला एवं संगीत प्रेमियों ने इसे एक अविस्मरणीय सांस्कृतिक अनुभव बताते हुए आयोजकों और कलाकारों को बधाई दी।