राजस्व पटवारी संघ दुर्ग ने मुख्य सचिव के नाम सौंपा ज्ञापन, पदोन्नति प्रक्रिया शुरू करने, वेतन विसंगति दूर करने और भर्ती नियमों में संशोधन की उठाई मांग

राजस्व पटवारी संघ दुर्ग ने मुख्य सचिव के नाम सौंपा ज्ञापन, पदोन्नति प्रक्रिया शुरू करने, वेतन विसंगति दूर करने और भर्ती नियमों में संशोधन की उठाई मांग

 दुर्ग। राजस्व पटवारी संघ छत्तीसगढ़ जिला दुर्ग ने पटवारियों की वर्षों से लंबित पदोन्नति, वेतन विसंगति और सेवा संबंधी समस्याओं के समाधान को लेकर शासन के खिलाफ आवाज बुलंद की है। संघ ने मुख्य सचिव, छत्तीसगढ़ शासन के नाम विस्तृत ज्ञापन सौंपते हुए मांग की है कि पटवारियों की लंबित पदोन्नति प्रक्रिया तत्काल शुरू की जाए, वेतन निर्धारण में व्याप्त विसंगतियों को दूर किया जाए तथा राजस्व निरीक्षक भर्ती नियमों में आवश्यक संशोधन कर न्यायसंगत व्यवस्था लागू की जाए। इस दौरान बड़ी संख्या में संघ के पदाधिकारी मौजूद थे।

रविकांत परगनिहा कार्यकारी जिलाध्यक्ष राजस्व पटवारी संघ न बताया कि वर्तमान में अलग-अलग तहसीलों में पटवारियों का वेतन अलग-अलग निर्धारित किया गया है, जिससे पूरे प्रदेश में वेतन निर्धारण की एकरूपता समाप्त हो गई है। इस स्थिति के कारण कर्मचारियों को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है। साथ ही कोष एवं लेखा सत्यापन में कठिनाइयां, अनावश्यक रिकवरी की आशंका तथा भविष्य में वेतनवृद्धि, पदोन्नति, पेंशन और अन्य सेवा लाभों पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ने की संभावना बनी हुई है। ज्ञापन में कहा गया है कि समान पद और समान सेवा अवधि होने के बावजूद कर्मचारियों के वेतन में अंतर है, जिससे असमानता की स्थिति पैदा हो गई है। इसे जल्द दूर करना आवश्यक है। संघ ने कहा कि इन मुद्दों को लेकर पहले भी शासन का ध्यान ज्ञापन, निवेदन और पत्राचार के माध्यम से आकर्षित कराया जा चुका है, लेकिन अब तक कोई ठोस निर्णय नहीं लिया गया है। यदि समस्याओं का शीघ्र समाधान नहीं हुआ तो पटवारियों में असंतोष और बढ़ सकता है।

 वर्षों से लंबित है पदोन्नति प्रक्रिया

राजस्व पटवारी संघ ने बताया कि वर्तमान में पटवारियों की पदोन्नति के लिए कोई निश्चित समय-सीमा निर्धारित नहीं है। इसके कारण कई पटवारी वर्षों तक एक ही पद पर कार्य करते हुए सेवानिवृत्त हो जाते हैं। इससे कर्मचारियों के मनोबल, कार्यक्षमता और प्रशासनिक व्यवस्था पर भी नकारात्मक प्रभाव पड़ रहा है। संघ ने मांग की है कि पटवारियों की लंबित पदोन्नति प्रक्रिया तत्काल प्रारंभ की जाए तथा पदोन्नति के लिए निश्चित समय-सीमा तय की जाए, ताकि पात्र कर्मचारियों को समय पर पदोन्नति का लाभ मिल सके।

राजस्व निरीक्षक भर्ती नियमों में संशोधन की मांग

संघ ने ज्ञापन में राजस्व निरीक्षक (आरआई) भर्ती नियमों में संशोधन की भी मांग उठाई है। पटवारियों का कहना है कि राजस्व निरीक्षक के रिक्त पदों पर केवल पटवारियों से ही पदोन्नति की व्यवस्था लागू की जाए। इसके अलावा भर्ती नियमों में संशोधन कर 50 प्रतिशत पद वरिष्ठता और 50 प्रतिशत पद विभागीय परीक्षा के आधार पर पदोन्नति का प्रावधान करने की मांग की गई है। वहीं राजस्व निरीक्षक के पदों पर सीधी भर्ती की व्यवस्था समाप्त करने का भी अनुरोध किया गया है।

वेतन विसंगति का दिया उदाहरण

संघ ने ज्ञापन में वर्ष 2010 भर्ती बैच का उदाहरण देते हुए बताया कि 1 जुलाई 2025 की स्थिति में ग्रेड पे 2200 से 2400 होने पर मूल वेतन 36,200 रुपये निर्धारित किया गया, जबकि ग्रेड पे 2200 से 2400 होकर 2800 होने पर मूल वेतन 35,300 रुपये निर्धारित कर दिया गया। संघ का कहना है कि यह वेतन निर्धारण के मूल सिद्धांतों के विपरीत है, क्योंकि उच्च ग्रेड पे मिलने के बाद मूल वेतन कम नहीं होना चाहिए। उनके अनुसार ऐसी स्थिति में मूल वेतन 36,400 रुपये होना चाहिए था। संघ का दावा है कि ऐसी विसंगतियां केवल एक बैच तक सीमित नहीं हैं, बल्कि अन्य भर्ती बैचों में भी देखने को मिल रही हैं।

सरकार से की पांच प्रमुख मांगें

राजस्व पटवारी संघ ने शासन से प्रमुख रूप से निम्न मांगें की हैं। पटवारियों की लंबित पदोन्नति प्रक्रिया तत्काल शुरू की जाए। पदोन्नति के लिए निश्चित समय-सीमा तय की जाए।  राजस्व निरीक्षक के रिक्त पद केवल पदोन्नति से भरे जाएं। भर्ती नियमों में संशोधन कर 50 प्रतिशत वरिष्ठता एवं 50 प्रतिशत विभागीय परीक्षा के आधार पर पदोन्नति का प्रावधान किया जाए। प्रदेशभर में वेतन निर्धारण के लिए स्पष्ट और एकरूप दिशा-निर्देश जारी कर वेतन विसंगति का शीघ्र एवं न्यायोचित निराकरण किया जाए।