1 अप्रैल से क्या बदलेगा आपकी जेब का गणित? राहत या महंगाई का झटका! सैलरी बढ़ेगी या खर्च? जानिए पूरा सच

1 अप्रैल 2026 से देश के आर्थिक ढांचे में बड़ा बदलाव शुरू हो रहा है। एक तरफ छह दशक पुराने आयकर कानून की जगह नया आयकर अधिनियम 2025 लागू हो रहा है, तो दूसरी तरफ जीएसटी 2.0 के नए नियम भी असर दिखाने लगेंगे। सवाल सीधा है, आम आदमी को राहत मिलेगी या खर्च और बढ़ेगा?

सबसे पहले बात टैक्स की। सरकार ने 12 लाख रुपये तक की सालाना आय को टैक्स फ्री करने का ऐलान किया है। इसके साथ वेतनभोगियों के लिए 75 हजार रुपये का स्टैंडर्ड डिडक्शन जारी रहेगा। यानी मिडिल क्लास के लिए बड़ी राहत की तस्वीर दिखती है। यहीं एक और बड़ा बदलाव है, अब ‘असेसमेंट ईयर’ और ‘प्रीवियस ईयर’ जैसे जटिल शब्द खत्म कर दिए गए हैं। अब सिर्फ एक टर्म होगा, “टैक्स ईयर 2026-27”। पुरानी टैक्स व्यवस्था में भी सरकार ने छूट बढ़ाई है। बच्चों की शिक्षा भत्ता और हॉस्टल भत्ता कई गुना बढ़ा दिया गया है। साथ ही पुणे, बेंगलुरु, हैदराबाद और अहमदाबाद जैसे शहरों को HRA में टियर-1 का दर्जा दिया गया है, जिससे किराए पर रहने वालों को सीधा फायदा होगा।

अब निवेश की बात। सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड पर टैक्स का नियम बदल गया है। शेयर बाजार में ट्रेडिंग करने वालों के लिए भी खर्च बढ़ेगा क्योंकि फ्यूचर्स और ऑप्शंस पर टैक्स बढ़ा दिया गया है। कंपनियों के शेयर बायबैक पर भी अब निवेशकों को टैक्स देना होगा। विदेश घूमने वालों के लिए राहत है। ओवरसीज टूर पैकेज पर TCS घटाकर 2% कर दिया गया है, जिससे इंटरनेशनल ट्रैवल सस्ता हो सकता है। अब आते हैं जीएसटी 2.0 पर। सरकार ने टैक्स स्लैब को सीमित कर दिया है। कुछ चीजें सस्ती हुई हैं, जैसे हेल्थ और लाइफ इंश्योरेंस, कई जरूरी दवाएं और बिना पैक वाले डेयरी प्रोडक्ट। छोटे कार, एसी और टीवी भी अब पहले से सस्ते हो सकते हैं। लेकिन दूसरी तरफ तंबाकू, लग्जरी गाड़ियां, बड़ी SUV और ऑनलाइन गेमिंग पर 40% तक टैक्स लगेगा, यानी इन पर खर्च बढ़ना तय है। अब सबसे बड़ा सवाल, क्या महंगाई बढ़ेगी? जवाब है, हां। पश्चिम एशिया के तनाव का असर सीधे आपकी रसोई पर पड़ा है। घरेलू एलपीजी सिलेंडर की कीमत 60 रुपये तक बढ़ गई है। कमर्शियल सिलेंडर महंगा होने से होटल और रेस्टोरेंट का खाना भी महंगा होगा। दवाइयों पर भी असर दिखेगा। 900 से ज्यादा जरूरी दवाओं की कीमतों में हल्की बढ़ोतरी को मंजूरी मिल चुकी है। गाड़ियों की कीमत भी बढ़ रही है। BS-7 मानकों की तैयारी और बढ़ती लागत के कारण कई कंपनियों ने कीमतें बढ़ा दी हैं।

बैंकिंग और डिजिटल पेमेंट के नियम भी बदल रहे हैं। एटीएम ट्रांजेक्शन लिमिट के बाद ज्यादा चार्ज देना होगा। डिजिटल पेमेंट में अब सिर्फ OTP नहीं, बल्कि 2-फैक्टर ऑथेंटिकेशन अनिवार्य होगा। नया पैन कार्ड बनवाने के लिए अब सिर्फ आधार नहीं, जन्म प्रमाण या 10वीं की मार्कशीट भी जरूरी होगी। पेंशन सिस्टम में राहत दी गई है। NPS में अब 80% तक रकम एकमुश्त निकाल सकेंगे। हेल्थ इंश्योरेंस में भी बड़ा बदलाव है, पांच साल तक प्रीमियम देने के बाद कंपनियां पुरानी बीमारी के आधार पर क्लेम रिजेक्ट नहीं कर पाएंगी। यात्रा करने वालों के लिए भी नियम बदले हैं। फास्टैग महंगा हो गया है और ट्रेन टिकट कैंसिलेशन के नियम सख्त कर दिए गए हैं।
एटीएम और बैंक खाते: एचडीएफसी बैंक अब यूपीआई आधारित कार्डलेस निकासी को भी पांच मुफ्त ट्रांजेक्शन में गिनेगा। लिमिट पार करने पर ₹23 चार्ज लगेगा। न्यूनतम बैलेंस न रखने पर बैंक अब मनमाना जुर्माना नहीं लगा सकेंगे, बल्कि यह शॉर्टफॉल (कमी) के अनुपात में होगा।
क्रेडिट कार्ड और पैन: नए पैन कार्ड के लिए अब सिर्फ आधार काफी नहीं होगा, 10वीं का सर्टिफिकेट या जन्म प्रमाण पत्र अनिवार्य होगा। सभी डिजिटल पेमेंट के लिए सिर्फ ओटीपी नहीं, बल्कि बायोमेट्रिक जैसे 2FA (डायनामिक फैक्टर) अनिवार्य कर दिए गए हैं।
ट्रेन और यात्रा से जुड़े नियमों में बदलाव
हाइवे पर यात्रा के लिए फास्टैग का एनुअल पास 3,000 से बढ़कर 3,075 रुपये हो गया है। वहीं, भारतीय रेलवे के नए नियम के अनुसार, ट्रेन प्रस्थान से आठ घंटे के भीतर कन्फर्म टिकट कैंसिल करने पर अब कोई रिफंड नहीं मिलेगा (पहले यह अवधि चार घंटे थी)।