भिलाई में बच्चों-युवाओं के लिए नाट्य कार्यशाला शुरू, जून तक चलेगी कला प्रशिक्षण की श्रृंखला

भिलाई में बच्चों-युवाओं के लिए नाट्य कार्यशाला शुरू, जून तक चलेगी कला प्रशिक्षण की श्रृंखला

भिलाई। दुर्ग-भिलाई अंचल में कला और संस्कृति को बढ़ावा देने के लिए एक बड़ी पहल शुरू हुई है। कला-साहित्य अकादमी, छत्तीसगढ़ (कवच) की महत्वाकांक्षी योजना के तहत मार्च के तीसरे सप्ताह से जून 2026 तक शहर को विभिन्न जोनों में बांटकर नाट्य, नृत्य, संगीत, ड्राइंग और पेंटिंग सहित कई कला विधाओं की कार्यशालाएं चरणबद्ध तरीके से आयोजित की जाएंगी।

इसी कड़ी में “वर्ल्ड डे ऑफ थिएटर फॉर चिल्ड्रेन एंड यूथ” के अवसर पर इप्टा, भिलाई शाखा द्वारा सेक्टर-1 स्थित नेहरू सांस्कृतिक सदन में बाल एवं युवा प्रतिभाओं के लिए नाट्य कार्यशाला के पहले चरण की शुरुआत की गई। आयोजन इप्टा के समन्वय में हुआ, जहां बड़ी संख्या में बच्चों और युवाओं ने उत्साह के साथ भाग लिया। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में समाजसेवी शांतनु दासगुप्ता उपस्थित रहे। उन्होंने कहा कि रंगमंच बच्चों और युवाओं में आत्मविश्वास, अभिव्यक्ति की क्षमता और सामाजिक समझ विकसित करने का सशक्त माध्यम है। उन्होंने प्रतिभागियों से अनुशासन और समर्पण के साथ प्रशिक्षण लेने की अपील की।

आयोजकों ने बताया कि इस कार्यशाला श्रृंखला का उद्देश्य केवल प्रशिक्षण देना नहीं, बल्कि बच्चों और युवाओं को कला के विभिन्न माध्यमों से जोड़ना और उनकी सृजनात्मक क्षमता को मंच देना है। साथ ही उन्हें राज्य और राष्ट्रीय स्तर पर अपनी प्रतिभा दिखाने के लिए तैयार करना भी लक्ष्य है।

कार्यशाला के पहले चरण का निर्देशन राष्ट्रीय स्तर पर पुरस्कृत रंगकर्मी चारु श्रीवास्तव और रोहित रेड्डी कर रहे हैं। प्रशिक्षण में स्थानीय स्कूलों के विद्यार्थियों के साथ-साथ इप्टा के प्रशिक्षु भी सक्रिय रूप से भाग ले रहे हैं। उद्घाटन कार्यक्रम में इप्टा के राष्ट्रीय सचिव राजेश श्रीवास्तव, कला-साहित्य अकादमी के अध्यक्ष शक्ति चक्रवर्ती, प्रदेश अध्यक्ष मणिमय मुखर्जी सहित कई वरिष्ठ कलाकार और पदाधिकारी मौजूद रहे। आयोजन को सफल बनाने में सुमिता बासु पाटिल, मणिमय मुखर्जी और कीर्तिलता देशमुख की विशेष भूमिका रही। आयोजकों ने बताया कि इच्छुक बच्चे और युवा सीधे स्थल पर पहुंचकर या संपर्क कर पंजीयन करा सकते हैं। इस पहल से नई पीढ़ी को कला से जोड़ने और उनमें आत्मविश्वास व सृजनशीलता विकसित करने की उम्मीद जताई जा रही है। कार्यक्रमों की श्रृंखला के तहत 23 मार्च को नेहरू सांस्कृतिक सदन में शहीद भगत सिंह, सुखदेव और राजगुरु की पुण्यतिथि पर “शहादत दिवस” का आयोजन भी किया जाएगा, जिसमें सांस्कृतिक प्रस्तुतियां दी जाएंगी।