एटा में इंसानियत शर्मसार: HIV पीड़ित महिला की मौत के बाद अंतिम संस्कार को तरसा शव, 10 साल का बेटा देखता रहा अपनों की राह

उत्तर प्रदेश। एटा जिले से इंसानियत को झकझोर देने वाला मामला सामने आया है। यहां HIV पीड़ित एक महिला की मौत के बाद न तो ससुराल पक्ष सामने आया और न ही मायके वाले। पोस्टमार्टम हाउस पर मां के शव के पास 10 वर्षीय बेटा अपनों के आने का इंतजार करता रहा, लेकिन किसी ने फोन तक उठाना जरूरी नहीं समझा। यह दर्दनाक घटना जैथरा थाना क्षेत्र से जुड़ी है। मृतका के पति की एक साल पहले ही HIV से मौत हो चुकी थी। अब मां के जाने के बाद 10 साल का बेटा और 17 साल की बेटी पूरी तरह बेसहारा हो गए हैं। बच्चे ने बताया कि मां लंबे समय से बीमार थीं। तबीयत बिगड़ने पर पांच दिन पहले मेडिकल कॉलेज में भर्ती कराया गया था, जहां गुरुवार सुबह इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई।

बेटे का कहना है कि पिता की HIV से मौत और मां के संक्रमित होने के बाद परिवार और गांव वालों ने दूरी बना ली थी। हालात ऐसे थे कि नल से पानी तक भरने नहीं दिया जाता था। मां की मौत की सूचना देने पर न ससुराल से कोई आया और न ही ननिहाल से। संवेदना जताना तो दूर, सभी ने फोन बंद कर लिए। रोते हुए बच्चे ने पुलिस को बताया कि उसे और उसकी बहन को जान से मारने की धमकियां मिल रही हैं। ऐसे में दोनों खुद को असुरक्षित महसूस कर रहे हैं। मामले की सूचना मिलते ही जैथरा थाना पुलिस मौके पर पहुंची। थाना प्रभारी रितेश ठाकुर ने बताया कि परिजन और ननिहाल पक्ष से संपर्क की कोशिश की गई, लेकिन सभी के फोन बंद मिले। पुलिस की ओर से पोस्टमार्टम के बाद महिला का अंतिम संस्कार कराया जाएगा। बच्चों द्वारा लगाए गए आरोपों की जांच की जा रही है और उन्हें सुरक्षा भी दी जाएगी।

महिला की मौत के बाद जिला प्रशासन भी हरकत में आया। चाइल्ड हेल्पलाइन, प्रोबेशन विभाग और अन्य संबंधित विभागों की टीमें पोस्टमार्टम हाउस पहुंचीं। बच्चों के भविष्य को देखते हुए चाइल्ड हेल्पलाइन ने दोनों भाई-बहन को संरक्षण में लेने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। यह मामला सिर्फ एक परिवार की त्रासदी नहीं, बल्कि समाज के उस चेहरे को उजागर करता है, जहां बीमारी के नाम पर इंसान को इंसान से अलग कर दिया जाता है। यहां सवाल सिर्फ कानून का नहीं, बल्कि संवेदना और जिम्मेदारी का भी है।

