तेल संकट के बीच केंद्र का बड़ा फैसला: ठेका श्रमिकों की नौकरी पर नहीं पड़ेगी आंच

भिलाई/दुर्ग। पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और तेल संकट के बीच केंद्र सरकार ने श्रमिकों के हित में बड़ा और अहम फैसला लिया है। सरकार ने देशभर के सभी केंद्रीय लोक उपक्रमों (PSU/CPSEs) को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि ठेका श्रमिकों की नौकरी, वेतन और सुविधाओं की हर हाल में सुरक्षा सुनिश्चित की जाए। इस फैसले पर दुर्ग लोकसभा क्षेत्र के सांसद विजय बघेल ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का आभार जताते हुए कहा कि यह कदम कठिन समय में श्रमिकों को बड़ी राहत देगा। वहीं, श्रम संगठनों ने भी इस निर्णय का स्वागत किया है। बीएसपी वर्कर्स यूनियन के अध्यक्ष उज्जवल दत्ता ने कहा कि इससे हजारों ठेका श्रमिकों की नौकरी सुरक्षित होगी और उनके परिवारों को आर्थिक स्थिरता मिलेगी।

लोक उद्यम विभाग की ओर से जारी आधिकारिक पत्र में मौजूदा वैश्विक परिस्थितियों का हवाला देते हुए कहा गया है कि इस समय श्रमिकों के हितों की रक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए। आर्थिक सलाहकार डॉ. सुमंत्रा पाल (आईईएस) द्वारा जारी इस पत्र को विभागीय सचिव की स्वीकृति भी प्राप्त है। निर्देशों में साफ कहा गया है कि किसी भी केंद्रीय उपक्रम में कार्यरत ठेका श्रमिकों को मौजूदा हालात के कारण काम से नहीं निकाला जाएगा। उत्पादन या आपूर्ति में अस्थायी बाधाएं आने के बावजूद श्रमिकों की छंटनी पर रोक लगाने के लिए कहा गया है, ताकि रोजगार पर कोई संकट न आए।

इसके साथ ही सभी उपक्रमों को यह भी सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं कि ठेका श्रमिकों को उनका वेतन, बोनस और अन्य वैधानिक सुविधाएं समय पर मिलें। सरकार का जोर इस बात पर है कि किसी भी श्रमिक या उसके परिवार को आर्थिक परेशानी का सामना न करना पड़े। केंद्र ने विभागों को श्रमिकों से जुड़े मामलों में संवेदनशील रवैया अपनाने और उनकी समस्याओं का त्वरित समाधान करने को कहा है। साथ ही, राज्य सरकारों और स्थानीय प्रशासन के साथ समन्वय बनाकर किसी भी संभावित विवाद या असंतोष को पहले ही रोकने के निर्देश दिए गए हैं।
