हिस्ट्री शीटर से लेकर निगरानी बदमाश सेक्टर 9 में अटेंडर के रूप में कार्यरत, महाप्रबंधक से पीड़ितों ने की शिकायत

हिस्ट्री शीटर से लेकर निगरानी बदमाश सेक्टर 9 में अटेंडर के रूप में कार्यरत, महाप्रबंधक से पीड़ितों ने की शिकायत

भिलाई। सेक्टर 9  हॉस्पिटल में अटेंडेंट के रूप में कार्य  कर रहे जितने भी अटेंडेंट है सभी के सभी मध्यप्रदेश , बालाघाट के निवासी और कुछ लोकल अपराधी किस्म में लड़के आपस में जुड़कर एक मोनोपल्ली के तहत गंभीर बीमारी से पीड़ितों और साधारण बीमारी से ग्रस्त मरोजी के परिजन से मजबूरी का फायदा उठाते हुए अवैध उगाही , मिनट टू मिनट चार्ज लेना , भीषण करोना काल में भिलाईवासी अपने जीवन के लिए संघर्षरत थे उस समय यह गिरोह 5000,5000 हजार रुपए प्रति दिन प्रति बीमार मरीजों के परिजनों से वसूलता था। इसकी शिकायत पीड़ितों ने प्रबंधन से की है।

शिकायत में बताया गया है कि इनकी दादागिरी इतनी बढ़ है की परिजन जब सुरक्षा गार्ड को अपनी परेशानी बताते है जो हमारे रिटायर्ड फौजी भाई है दिन रात हॉस्पिटल के सुरक्षा में लगे रहते है अटेंडेंट के ग्रुप और कई अपराधी किस्म के अटेंडेट द्वारा चाकू मारने , बाहर निकल जान से मारने की धमकी दी जाती है।
किसी भी अटेंडेंट का पुलिस वेरिफिकेशन रिकार्ड नही है ना ही सेक्टर 9 हॉस्पिटल मैनेजमेंट द्वारा अटेंडेटर से जानकारी की मांग भी नही करता है कोई भी बड़ी दुर्घटना होने में देर नहीं है
परिजनों की जरूरत पर ये गुण्डातत्व अटेंडर शराब के नशे में और कई प्रकार की नशीली मेडिसिन के सेवन करके ये गुण्डातत्व बाहरी गिरोह अपनी मनमानी करते है पीड़ित परिजनों को अटेंडर रखने की संपूर्ण जवाबदेही की शर्तो पर मैनेजमेंट फार्म भरवाकर उनका हस्ताक्षर लेकर  रखने की इजाजत दी जाती है  परिजनों की मजबूरी का फायदा ये अटेंडेंट और सेक्टर 9 हॉस्पिटल मैनेजमेंट दोनो ही भरपूर उठा रहे हैं मैनेजमेंट इस अवैध रूप से नाक के नीचे पल रहे  कालाबाजारी व्यापार से पल्ला झाड़ कर अनदेखी कर रहा है
पूर्व विगत वर्ष इसी गिरोह द्वारा नाबालिक बच्ची से दुराचार किया गया था जिसमे पास्को एक्ट के तहत कार्यवाही की गई है। परिजनों के मोबाइल चोरी,बैग चोरी महंगी वस्तु चोरी होना आम बात हो गई है। किसी राजिस्ट्रर्ड संस्था या एजेंसी के द्वारा जरूरत मंद ईमानदार लोगों को अटेंडर का कार्य करने की नियम और शर्तों के साथ अटेंडर मुहैया कराई जाए ताकि यह भयमुक्त गुण्डातत्व जैसे लोगो से पीड़ित परिजनों और शहरवासियों को बचाया जा सके और बेहतर सुविधा दी जाए। वर्तमान में अटेंडर के रूप में कार्यरत किसी भी वैक्त्ती का पुलिस वेरिफिकेशन प्रमाण पत्र नही है।