अपने अधिकारों को संरक्षित करने के लिए नवीन कानून की जानकारी जरूरी - न्यायाधीश कुजूर

अपने अधिकारों को संरक्षित करने के लिए नवीन कानून की जानकारी जरूरी - न्यायाधीश कुजूर

भिलाई। पुलिस कण्ट्रोल रूम, सेक्टर-06 भिलाई में तीन नवीन भारतीय आपराधिक कानूनों से जागरूक किए जाने छात्र-छात्राओं एवं आम नागरिकों के लिए एकदिवसीय प्रदर्शनी का आयोजन किया गया। अतिथि के रूप में जिला एवं सत्र न्यायाधीश के. विनोद कुजूर, सीजेएम भूपेश बसंत, दुर्ग एसएसपी विजय अग्रवाल, विधिक सेवा समिति के सचिव उमेश कुमार उपस्थित थे।

शनिवार को आयोजित नवीन भारतीय आपराधिक कानून प्रदर्शनी में बड़ी संख्या छात्र-छात्राएं व एनसीसी कैडेट्स शामिल हुए। पोस्टर के माध्यम से स्कूली विद्यार्थियों को नवीन कानून की जानकारी दी गई। वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक विजय अग्रवाल ने छात्र-छात्राओं को संबोधित करते हुए कहा कि नवीन आपराधिक कानून अब दण्डात्मक के स्थान पर न्यायवरक एवं सुधारात्मक है। कानून में न्याय को प्राथमिकता दी गई है। इसमें नागरिकों की सुरक्षा पर जोर दिया गया है। एसएसपी ने त्रिनयन एप एवं समाधान एप के संबंध में जानकारी देकर इमरजेंसी नम्बर से भी छात्र-छात्राओं को अवगत कराया।

वहीं सीजेएम भूपेश बसंत ने नवीन प्रावधानों की जानकारी देते हुए सायबर क्राइम से बचने हेतु आवश्यक उपाय बताए। कार्यशाला के दौरान ही उपस्थित छात्र-छात्राओं को कण्ट्रोल रूम परिसर में नवीन आपराधिक कानूनों की लगाई गई प्रदर्शनी का भ्रमण कराकर विस्तार से जानकारी दी गई एवं कण्ट्रोल रूम का भ्रमण भी कराया गया। कार्यशाला में सुखनंदन राठौर अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक दुर्ग शहर, अभिषेक झा अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक ग्रामीण, पदमश्री तंवर अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक आईयूसीएडब्ल्यू, वैजयंती माला तिग्गा उप पुलिस अधीक्षक, सत्यप्रकाश तिवारी सीएसपी सहित लगभग 300 छात्र-छात्राएं उपस्थित थे ।

मुख्य अतिथि जिला एवं सत्र न्यायाधीश के. विनोद कुजूर ने भारतीय न्याय संहिता 2023, भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता 2023 एवं भारतीय साक्ष्य अधिनियम 2023 के प्रावधानों से अवगत कराया गया। नवीन आपराधिक कानून के अन्तर्गत बच्चों एवं महिलाओं के विरूद्ध अपराध से निपटने के लिए शामिल किए गए धाराओं की विशेषताओं से भी अवगत कराया गया। प्रधान जिला न्यायाधीश ने नवीन कानून के प्रावधानों को लेकर विस्तार से जानकारी देते हुए प्रदर्शनी के लिए उन्होंने दुर्ग पुलिस की सराहना की। अतिथि जिला एवं सत्र न्यायाधीश के. विनोद कुजूर ने बच्चों को संबोधित करते हुए कहा कि जब वे छोटे थे तो उन्हें थाने परिसर में प्रवेश करने से डर लगता था। प्रशासन आपको एक निर्भिकता उपलब्ब्ध करा रहा है कि एक परिसर में जहां एक समय प्रवेश करने से डर लगता था, आज उल्लास और उत्साह के साथ बड़ी संख्या में बच्चे उपस्थित है। कानून सिर्फ अदालतों और पुलिस से जुड़ी हुई विषय वस्तु नहीं है। कानून आम नागरिकों की सुरक्षा, उनकी गरिमा को संरिक्षत करने के लिए है। यह पार्ट आम जनता का भी है। कानून जनभागीदारी का हिस्सा है। इस उद्देश्य से प्रदर्शनी का आयोजन किया गया।

जिला एवं सत्र न्यायाधीश के. विनोद कुजूर ने बच्चों को संबोधित करते हुए कहा कि आज के समय में जब तकनीकी, शिक्षा बढ़ रही है, अवयरनेस बढ़ रहा है तो अपराध के तरीके भी बढ़ रहा है। पहले शारीरिक अपराध ज्यादा होते थे और आज कल इलेक्ट्रानिक उपकरणों के माध्यम से अपराध हो रहा है। डिजिटल अरेस्ट के दौरान जागरूकता की कमी, संकोच या परिस्थित विशेष में लोग अभिव्यक्त नहीं कर पाते। आने वाले समय में अपने आप को अपने अधिकारों को संरक्षित करने के लिए नवीन कानून की जानकारी जरूरी है। ताकि अपराध के समय हम अपने आप को सुरक्षित रख सके। हमारा कर्तव्य है कि अपराध का विरोध करना। यदि आप अन्याय को सहन करेंगे तो आपके साथ दुबारा बड़े अपराध होंगे। मुख्य अतिथि जिला एवं सत्र न्यायाधीश के. विनोद कुजूर ने सभी बच्चों को जिला न्यायालय आमंत्रित किए जिससे विद्यार्थी चिल्ड्रन कोर्ट और पाक्सो कोर्ट की गतिविधियों से अवगत हो सके।