कोयला तस्करी केस में ईडी की बड़ी कार्रवाई, IPAC से जुड़े 10 ठिकानों पर छापे, बंगाल में जांच में बाधा का आरोप

नई दिल्ली/कोलकाता। कोयला तस्करी मामले में प्रवर्तन निदेशालय ने 8 जनवरी को बड़ी कार्रवाई की है। यह कार्रवाई सीबीआई कोलकाता की एफआईआर के आधार पर की गई, जिसमें आरोपी अनूप माजी और अन्य के खिलाफ जांच चल रही है। ईडी ने इस मामले में मनी लॉन्ड्रिंग का केस दर्ज कर कई ठिकानों पर तलाशी ली।

जांच में सामने आया है कि अनूप माजी के नेतृत्व में कोयला तस्करी सिंडिकेट पश्चिम बंगाल के ईसीएल क्षेत्रों से अवैध रूप से कोयला निकालकर विभिन्न फैक्ट्रियों और प्लांट्स में बेचता था। यह कोयला बांकुड़ा, बर्धमान, पुरुलिया समेत कई जिलों में सप्लाई किया गया। ईडी के मुताबिक, इस अवैध कारोबार से हुई कमाई का बड़ा हिस्सा शाकंभरी ग्रुप ऑफ कंपनियों को गया।

ईडी का दावा है कि इस पूरे नेटवर्क में हवाला ऑपरेटरों की अहम भूमिका रही। जांच में यह भी सामने आया कि कोयला तस्करी से अर्जित धन को हवाला के जरिए लेयरिंग कर इंडियन पैक कंसल्टिंग प्राइवेट लिमिटेड यानी IPAC तक पहुंचाया गया। लेनदेन की राशि दर्जनों करोड़ रुपये बताई जा रही है।
तलाशी अभियान के दौरान पश्चिम बंगाल में 6 और दिल्ली में 4 परिसरों को कवर किया गया। ईडी के अनुसार, कार्रवाई शांतिपूर्ण और कानूनी तरीके से चल रही थी, इसी दौरान पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी पुलिस अधिकारियों के साथ एक आवासीय परिसर में पहुंचीं। आरोप है कि वहां से महत्वपूर्ण दस्तावेज और इलेक्ट्रॉनिक उपकरण ले जाए गए।
इसके बाद मुख्यमंत्री का काफिला IPAC के कार्यालय पहुंचा, जहां से भी दस्तावेज और इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य हटाए जाने का आरोप लगाया गया है। ईडी का कहना है कि इन घटनाओं से मनी लॉन्ड्रिंग की जांच और कानूनी प्रक्रिया में बाधा उत्पन्न हुई है।
ईडी ने स्पष्ट किया है कि यह कार्रवाई पूरी तरह साक्ष्यों के आधार पर की गई है और किसी भी राजनीतिक दल या पार्टी कार्यालय को निशाना नहीं बनाया गया है। एजेंसी के अनुसार, इसका चुनावों से कोई संबंध नहीं है और यह मनी लॉन्ड्रिंग के खिलाफ नियमित कार्रवाई का हिस्सा है।

