जमीन सौदे में बड़ा फर्जीवाड़ा! कोर्ट के आदेश पर भिलाई के उद्योगपति दंपति पर FIR, करोड़ों की धोखाधड़ी का आरोप
सुपेला थाना में अपराध दर्ज

भिलाई। जुनवानी भूमि प्रकरण में लंबे समय से चल रहे विवाद ने अब बड़ा कानूनी मोड़ ले लिया है। न्यायालय के निर्देश के बाद सुपेला थाना पुलिस ने सिंपलेक्स कास्टिंग्स लिमिटेड से जुड़े उद्योगपति केतन शाह और उनकी पत्नी संगीता केतन शाह के खिलाफ गंभीर धाराओं में अपराध दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।

जानकारी के अनुसार शिकायतकर्ता सुनील कुमार सोमन (47 वर्ष) पिता केशवान सोमन लगातार मामले में कार्रवाई की मांग कर रहे थे। थाना स्तर से लेकर उच्च अधिकारियों और शासन तक गुहार लगाने के बाद भी कार्रवाई नहीं होने पर उन्होंने न्यायालय की शरण ली। इसके बाद न्यायालय के स्पष्ट आदेश पर सुपेला पुलिस ने भारतीय दंड संहिता की धारा 120, 406, 420, 468, 471 के तहत मामला दर्ज किया है।

शिकायतकर्ता का आरोप है कि जुनवानी स्थित जिस भूमि का सौदा किया गया, वह पहले से विवादित थी और मामला न्यायालय में विचाराधीन था। इसके बावजूद तथ्यों को छुपाकर जमीन का एग्रीमेंट किया गया और बड़ी रकम का भुगतान भी लिया गया। आरोप है कि भुगतान लेने के बाद भी रजिस्ट्री नहीं की गई और लगातार टालमटोल की जाती रही। मामले में यह भी आरोप लगाया गया है कि उसी संपत्ति को आधार बनाकर वित्तीय संस्था से ऋण लिया गया और एक ही जमीन के नाम पर दोहरी आर्थिक गतिविधियां की गईं।

शिकायतकर्ता का कहना है कि संबंधित कंपनी पिछले लगभग 50 वर्षों से संचालित एक नामचीन औद्योगिक समूह है, जो सामाजिक और राजनीतिक रूप से प्रभावशाली छवि रखता है। इसी भरोसे के आधार पर लोगों ने आर्थिक लेन-देन किए, लेकिन बाद में उन्हें कथित तौर पर धोखाधड़ी का सामना करना पड़ा। सुनील कुमार सोमन ने आरोप लगाया कि उन्होंने थाना से लेकर मुख्यमंत्री कार्यालय तक न्याय की गुहार लगाई, लेकिन कार्रवाई के बजाय आरोपियों को बचाने की कोशिश की गई। अब न्यायालय के हस्तक्षेप के बाद सुपेला थाने में अपराध दर्ज होने से मामले में नई हलचल शुरू हो गई है।
न्यायालय का आदेश
अभियुक्ता संगीता शाह (डायरेक्टर, सिम्पलेक्स कास्टिंग लिमिटेड) एवं उसके पति केतन शाह ने ग्राम कोहका स्थित भूमि को निर्विवाद व भारमुक्त बताकर ₹50,00,000/- में विक्रय का सौदा किया तथा दिनांक 13.03.2023 को इकरारनामा निष्पादित कर ₹10,00,000/- अग्रिम राशि प्राप्त की। बाद में विक्रय विलेख निष्पादन से इंकार किया गया। प्रार्थी को जानकारी हुई कि उक्त भूमि पूर्व से ही किराये/लीज पर दी गई थी एवं विवादित थी, जिसे छिपाकर धोखाधड़ी की गई। साथ ही, उसी भूमि के मूल दस्तावेज लेकर अभियुक्तों द्वारा वित्तीय संस्था से ऋण प्राप्त कर लिया गया। प्रार्थी द्वारा विभिन्न नोटिस एवं प्रयासों के बावजूद इकरारनामा का पालन नहीं किया गया। उक्त कृत्य को छल, कपट, धोखाधड़ी एवं न्यासभंग बताते हुए अभियुक्तगण के विरुद्ध धारा 120 बी, 406, 416, 420, 467, 468, 471, 34 भा.दं.सं. के अंतर्गत अपराध पंजीबद्ध कर विवेचना कराने की प्रार्थना की गई है।आवेदन के परिपेक्ष्य में अभिलेख का अवलोकन किया गया। अवलोकन से प्रथमदृष्ट्या दर्शित है कि प्रस्तावित अभियुक्ता संगीता केतन शाह (डायरेक्टर, सिम्पलेक्स कास्टिंग लिमिटेड) के द्वारा मौजा ग्राम कोहका, पटवारी हल्का नं. 14/19 रा.नि.म. दुर्ग तहसील एवं जिला दुर्ग (छ.ग.) खसरा क्रमांक 2049, 2023/2, 2023/1, 2071/1 कुल रकबा लगभग 0.10 हेक्टेयर भूमि को यह जानते हुये कि उक्त भूमि पर विवाद विद्यमान है उसे पाक साफ बताकर दिनांक 13.03.2023 को उक्त भूमि बयाना राशि ₹10,00,000 (अक्षरी दस लाख रुपये) प्राप्त कर उपरोक्त भूमि को ₹50,00,000 (अक्षरी पचास लाख रुपये) में विक्रय इकरारनामा आवेदक सुनील कुमार सोमन के पक्ष में निष्पादित किया तथा उपरोक्त भूमि का विक्रय इकरारनामा आवेदक के पक्ष में करने के उपरान्त भी भूमि को बंधक रखकर एक्सीस फाईनेन्स लिमिटेड से लगभग ₹450,00,000 (अक्षरी चार करोड़ पचास लाख रुपये) ऋण प्राप्त कर लिया। इस प्रकार प्रस्तावित अभियुक्ता श्रीमती संगीता केतन शाह के द्वारा प्रथम दृष्टया संज्ञेय प्रकृति का अपराध कारित किया जाना दर्शित है तथा प्रस्तुत दस्तावेजो पर विचार उपरान्त यह एक उपयुक्त मामला प्रतित हो रहा है जिसमें अन्वेषण हेतु निर्देश जारी किया जाना न्यायोचित एवं आवश्यक है। माननीय सर्वोच्च न्यायालय द्वारा माननीय न्याय दृष्टांत ललीता कुमार विरुद्ध उत्तर प्रदेश राज्य (2014) 2 SCC 1 में पारित निर्देशानुसार यदि संज्ञेय अपराध की इत्तिला थाना को प्राप्त हो तो उक्त संबंध में अपराध पंजीबद्ध किया जाना आज्ञापक है। माननीय सर्वोच्च न्यायालय द्वारा माननीय न्याय दृष्टांत साकीरी वासू विरुद्ध उत्तर प्रदेश राज्य (2008) 2 SCC 409 में अभिनिर्धारित किया गया है कि धारा 156 (3) द.प्र.सं. के अन्तर्गत न्यायिक मजिस्ट्रेट को प्रथम सूचना रिपोर्ट का पंजीकरण एवं अन्वेषण का निर्देश देने और समुचित अन्वेषण कराने की व्यापक शक्ति प्राप्त है। हस्तगत मामले में प्रस्तुत दस्तावेजो के अवलोकन उपरान्त प्रथम दृष्टया संज्ञेय प्रकृति का अपराध कारित किया जाना दर्शित है तथा परिस्थितियाँ उचित जाँच की माँग करती हैं। अतः उपरोक्त विश्लेषण एवं निष्कर्षों के आलोक में, धारा 156(3) द.प्र.सं. (175 (3) भा.ना.सु.सं.) के अंतर्गत प्राप्त शक्ति का प्रयोग करते हुए, यह न्यायालय आदेश देता है कि आरक्षी केन्द्र प्रभारी सुपेला, जिला दुर्ग (छ.ग.) प्रस्तावित अभियुक्ता श्रीमती संगीता केतन शाह तथा अन्य संबंधित व्यक्तियों के विरुद्ध आवेदक के अभिकथनों एवं संलग्न साक्ष्यों के परिप्रेक्ष्य में धारा 406, 420, 468, 471 भारतीय दण्ड संहिता या ऐसी अन्य धाराओं के अंतर्गत जो साक्ष्यों के आधार पर उचित हों, अपराध पंजीबद्ध कर अन्वेषण करें एवं अन्वेषण उपरान्त विधिवत अंतिम प्रतिवेदन न्यायालय में प्रस्तुत करें।उपरोक्तानुसार आवेदन निराकृत। इस आदेश की सत्यप्रति आवेदक द्वारा प्रस्तुत आवेदन मय दस्तावेजों के साथ संबंधित आरक्षी केन्द्र को विधिवत भेजी जावें। प्रकरण समाप्त। परिणाम दर्ज कर अभिलेख विधिवत अभिलेखागार भेजा जावें।
