स्वास्थ्य कर्मचारियों ने खोला मोर्चा, मांगों को लेकर मुख्यमंत्री और स्वास्थ्य मंत्री के नाम सौंपा ज्ञापन
वेतन विसंगति दूर करने, नियमित भर्ती, पदोन्नति और निजीकरण पर रोक की मांग


दुर्ग। छत्तीसगढ़ प्रदेश स्वास्थ्य कर्मचारी संघ ने मंगलवार को अपनी विभिन्न लंबित मांगों को लेकर सांकेतिक धरना और रैली आयोजित कर सरकार का ध्यान स्वास्थ्य कर्मचारियों की समस्याओं की ओर आकर्षित किया। भोजन अवकाश के दौरान जिला चिकित्सालय दुर्ग से रैली निकालकर कर्मचारियों ने मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी सीएमएचओ कार्यालय पहुंचकर मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय, स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल एवं स्वास्थ्य सचिव अमित कटारिया के नाम ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन की प्रतिलिपि कलेक्टर दुर्ग और सीएमएचओ को भी दी गई।

प्रदेश महामंत्री सैय्यद असलम, उप प्रांताध्यक्ष प्रमेश पाल, संभागीय अध्यक्ष अजय नायक, जिला अध्यक्ष सत्येंद्र गुप्ता तथा जिला सचिव भूपेश उपाध्याय ने बताया कि स्वास्थ्य विभाग के कर्मचारियों की कई महत्वपूर्ण मांगें लंबे समय से लंबित हैं, जिनके निराकरण के लिए सरकार को लगातार अवगत कराया जा रहा है, लेकिन अब तक कोई ठोस निर्णय नहीं लिया गया है। संघ ने अपनी प्रमुख मांगों में सभी कैडरों की वेतन विसंगति दूर करने, तृतीय एवं चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों की विभागीय पदोन्नति सुनिश्चित करने, ठेका प्रथा, आउटसोर्सिंग और संविदा व्यवस्था समाप्त करने की मांग उठाई। इसके साथ ही प्रदेश में अस्पतालों के निजीकरण पर रोक लगाने तथा जीवनदीप समिति के कर्मचारियों को नियमित करने की भी मांग की गई। कार्यक्रम में मेडिकल कॉलेज अस्पताल कंचादूर की नर्सिंग प्रकोष्ठ की अध्यक्ष जैकलीन डान, जिला अस्पताल दुर्ग की मंजू राय, कविता साहू, नर्सिंग संयोजक शिवेन्द्र साहू, जिला अस्पताल संयोजक दुर्ग राघवेंद्र साहू, कार्यकारी जिलाध्यक्ष खिलावन चंद्राकर, महामंत्री लक्ष्मीकांत धोटे, सुपेला अध्यक्ष सुशीला सिंह, निकुम अध्यक्ष यामनी नेताम, जीवन दीप समिति अध्यक्ष लक्ष्मी कांत, सरस्वती चंद्राकर, योगेश ठाकुर, मुकेश शर्मा सहित नर्सिंग कैडर, लैब कैडर, चतुर्थ श्रेणी कैडर, रेडियो ग्राफर कैडर, आया वार्ड वाया, ड्रेसर कैडर फार्मासिस्ट कैडर वाहन चालक कैडर, स्वास्थ्य संयोजक, स्वास्थ्य सुपरवाइजर आदि मौजूद थे।

कर्मचारियों ने मांगा स्थायी समाधान
स्वास्थ्य कर्मचारी संघ का कहना है कि प्रदेश के विभिन्न अस्पतालों और स्वास्थ्य संस्थानों में बड़ी संख्या में पद रिक्त हैं, जिसके कारण कार्यरत कर्मचारियों पर अतिरिक्त कार्यभार बढ़ता जा रहा है। ऐसे में रिक्त पदों पर नियमित भर्ती प्रक्रिया शुरू कर स्थायी नियुक्तियां की जानी चाहिए, ताकि स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता और कार्यक्षमता में सुधार हो सके। संघ पदाधिकारियों ने कहा कि स्वास्थ्य सेवाएं आम जनता से सीधे जुड़ा हुआ विषय है। यदि नियमित पदों को समाप्त कर ठेका, आउटसोर्सिंग और संविदा व्यवस्था को बढ़ावा दिया जाता है तो इसका प्रतिकूल असर स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता पर पड़ सकता है। इसलिए सरकार को कर्मचारियों और आम जनता के हित में स्थायी समाधान निकालना चाहिए।
कर्मचारियों पर बनाया जा रहा दबाव
एक ओर कर्मचारियों पर पोर्टल में जानकारी दर्ज करने का दबाव है, वहीं दूसरी ओर उन्हें फील्ड में जाकर हितग्राहियों को स्वास्थ्य सेवाएं भी उपलब्ध करानी होती हैं। इस दोहरे दबाव के कारण कर्मचारियों को भारी मानसिक तनाव का सामना करना पड़ रहा है और मरीजों को भी समय पर सेवाएं मिलने में कठिनाई हो रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि विभाग के नोडल अधिकारियों द्वारा प्रतिदिन वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग (वीसी) के माध्यम से लगातार लक्ष्य पूरे करने का दबाव बनाया जाता है, जबकि अधिकांश अधिकारी स्वयं फील्ड में जाकर वास्तविक स्थिति का निरीक्षण नहीं करते। कर्मचारियों को दो-तीन दिनों में लक्ष्य पूरा करने के निर्देश देकर अनावश्यक दबाव बनाया जा रहा है।
स्वास्थ्य सेवाओं के निजीकरण पर जताई चिंता
स्वास्थ्य विभाग में रिक्त पदों को शीघ्र भरा जाना चाहिए तथा नियमित पदों को समाप्त करने के बजाय उन्हें जीवंत रखा जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य सेवाओं के क्षेत्र में बढ़ते निजीकरण से व्यवस्था मजबूत होने के बजाय और अधिक अव्यवस्थित होने का खतरा है। विभाग के विभिन्न कार्यक्रमों के लिए बनाए गए अलग-अलग रिपोर्टिंग पोर्टलों को एकीकृत कर एकल पोर्टल प्रणाली विकसित की जाए। साथ ही ओटीपी आधारित अनिवार्य प्रक्रिया समाप्त करने और प्रत्येक हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर (एचडब्ल्यूसी) तथा स्वास्थ्य केंद्र में डाटा एंट्री ऑपरेटर नियुक्त करने की मांग भी की।