तीजन बाई को कलाकारों की श्रद्धांजलि, भिलाई में तंबूरा स्मारक बनाने की उठी मांग

रविन्द्र निकेतन में श्रद्धांजलि सभा, कलाकारों ने कहा, आने वाली पीढ़ियों के लिए बने तीजन बाई की स्मृति का स्थायी प्रतीक

तीजन बाई को कलाकारों की श्रद्धांजलि, भिलाई में तंबूरा स्मारक बनाने की उठी मांग

भिलाई। पंडवानी की विश्वविख्यात साधिका और पद्म विभूषण स्वर्गीय डॉ. तीजन बाई को भिलाई में आयोजित श्रद्धांजलि सभा में भावभीनी श्रद्धांजलि दी गई। कला साहित्य अकादमी छत्तीसगढ़ (कवच) की ओर से रविन्द्र निकेतन, कालीबाड़ी (हुडको) में आयोजित कार्यक्रम में साहित्यकारों, कलाकारों और संस्कृतिप्रेमियों ने उनके योगदान को याद करते हुए उन्हें छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक पहचान का सबसे बड़ा प्रतीक बताया।

कार्यक्रम की शुरुआत डॉ. तीजन बाई के तैलचित्र पर माल्यार्पण और पुष्पांजलि अर्पित कर की गई। इस दौरान उपस्थित सभी लोगों ने दो मिनट का मौन रखकर दिवंगत आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना की। वक्ताओं ने कहा कि तीजन बाई ने अपनी अद्भुत गायन शैली और संघर्षपूर्ण जीवन के बल पर पंडवानी को गांव की चौपालों से निकालकर अंतरराष्ट्रीय मंच तक पहुंचाया। उन्होंने न केवल छत्तीसगढ़ी लोककला को वैश्विक पहचान दिलाई, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए भी प्रेरणा का स्रोत बन गईं।

श्रद्धांजलि सभा में साहित्यकार विजय दिल्लीवार "वर्तमान" ने तीजन बाई के संघर्ष और जीवन से जुड़े कई ऐसे प्रसंग साझा किए, जिनसे बहुत कम लोग परिचित हैं। वक्ताओं ने कहा कि उनका निधन केवल छत्तीसगढ़ ही नहीं, बल्कि पूरे देश के कला जगत के लिए अपूरणीय क्षति है।

कार्यक्रम के दौरान एक महत्वपूर्ण मांग भी सामने आई। कलाकारों और साहित्यकारों ने भिलाई के किसी प्रमुख चौराहे पर डॉ. तीजन बाई की स्मृति में विशाल तंबूरा स्मारक स्थापित करने की मांग की। साथ ही सुझाव दिया गया कि स्मारक पर भिलाई इस्पात संयंत्र के स्थापना काल यानी 1960 से 70 के दशक के दिवंगत कलाकारों और साहित्यकारों के नाम भी अंकित किए जाएं, ताकि आने वाली पीढ़ियां छत्तीसगढ़ की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत और उसके पुरोधाओं को सदैव याद रख सकें।

श्रद्धांजलि सभा का संचालन श्रीमती रचना श्रीवास्तव ने किया। कार्यक्रम में रचना श्रीवास्तव, शान्तनु दासगुप्ता, ममता देवी, चन्द्रा बैनर्जी, मौ दत्ता, सुमिता सरकार, भाष्वोती बोस, डॉ. संस्कृति वर्मा, एल. रुद्र मूर्ति, एम. जनकीराव, जय प्रकाश नायर, मिथुन दास, परविंदर सिंह, विजय दिल्लीवार "वर्तमान", रिखी क्षत्रिय, मुमताज, त्रिलोक तिवारी, मणिमय मुखर्जी, बरुण चक्रवर्ती, रामचन्द्र सामंत, प्रदीप गोले, मुकेश पटेल, श्रवण कुमार, शक्ति चक्रवर्ती, पी.पी. बिस्वास, प्रदीप कुमार मित्रा, आशुतोष बोस, सोमा बोस, रुमा बर्धन, स्वरा, अयन दत्ता उपस्थित रहे।