ऑपरेशन साइबर शील्ड: फर्जी सिम बेचने वाले दो POS एजेंट गिरफ्तार, साइबर ठगों को ऊंची कीमत पर बेचते थे सिम
फेसबुक वीडियो कॉल ब्लैकमेलिंग और KBC इनाम के नाम पर ठगी में इस्तेमाल हुए सिम, डबल थंब स्कैन और फर्जी ई-केवाईसी से करते थे अतिरिक्त सिम एक्टिवेट

रायपुर। साइबर अपराधों पर प्रभावी अंकुश लगाने के उद्देश्य से रायपुर रेंज पुलिस द्वारा चलाए जा रहे ऑपरेशन साइबर शील्ड के तहत बड़ी कार्रवाई करते हुए फर्जी तरीके से सिम कार्ड उपलब्ध कराने वाले दो पीओएस (पॉइंट ऑफ सेल) एजेंटों को गिरफ्तार किया गया है। आरोप है कि दोनों आरोपी ग्राहकों की ई-केवाईसी प्रक्रिया का दुरुपयोग कर अतिरिक्त सिम कार्ड एक्टिवेट करते थे और उन्हें साइबर अपराधियों को ऊंची कीमत पर बेच देते थे।
रायपुर रेंज के पुलिस महानिरीक्षक अमरेश मिश्रा के निर्देशन में रेंज साइबर थाना की टीम ने तकनीकी जांच के आधार पर यह कार्रवाई की। जांच में सामने आया कि आरोपियों द्वारा बेचे गए सिम कार्ड का उपयोग सोशल मीडिया पर दोस्ती कर वीडियो कॉल के जरिए ब्लैकमेलिंग और कौन बनेगा करोड़पति (KBC) में इनाम दिलाने के नाम पर की गई साइबर ठगी सहित कई अपराधों में किया गया था। पुलिस के अनुसार, गरियाबंद जिले के इंदागांव थाना क्षेत्र में एक मामले में आरोपियों ने फेसबुक पर दोस्ती करने के बाद व्हाट्सऐप वीडियो कॉल के जरिए पीड़ित का अश्लील वीडियो तैयार किया और उसे वायरल करने की धमकी देकर करीब 7.90 लाख रुपये की ठगी की थी। वहीं दूसरे मामले में एक व्यक्ति को KBC में इनाम जीतने का झांसा देकर टैक्स और अन्य शुल्क के नाम पर रकम ऐंठी गई थी।

दोनों मामलों की जांच के दौरान पुलिस ने संबंधित मोबाइल नंबरों, सिम कार्ड और सोशल मीडिया खातों का तकनीकी विश्लेषण किया। सेवा प्रदाता कंपनियों से प्राप्त जानकारी, पीड़ितों और गवाहों के बयान तथा पूछताछ के आधार पर फर्जी सिम बेचने वाले दो मोबाइल दुकान संचालकों की पहचान की गई। गिरफ्तार आरोपियों में उमेश प्रजापति (23) निवासी मनकारी, जिला छतरपुर (मध्यप्रदेश) तथा मनोज देवांगन (29) निवासी प्रकाशपुर चिचोला, जिला खैरागढ़ शामिल हैं। उमेश छतरपुर में प्रजापति टेलीकॉम का संचालन करता था, जबकि मनोज खैरागढ़ क्षेत्र में मोबाइल दुकान संचालित करता था।
पूछताछ में आरोपियों ने खुलासा किया कि नया सिम जारी करने या मोबाइल नंबर पोर्ट कराने की प्रक्रिया के दौरान वे ग्राहकों के डबल थंब स्कैन, आई ब्लिंक और ई-केवाईसी का दुरुपयोग कर अतिरिक्त सिम कार्ड सक्रिय कर लेते थे। इसके अलावा आधार कार्ड की फिजिकल कॉपी रखने वाले ग्राहकों के दस्तावेजों का इस्तेमाल कर डी-केवाईसी के माध्यम से भी फर्जी सिम तैयार किए जाते थे। बाद में इन सिम कार्डों को साइबर अपराधियों को मोटी रकम लेकर बेच दिया जाता था।
पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ प्रकरण दर्ज कर उन्हें न्यायालय में पेश किया है। साथ ही इस नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की पहचान कर उनके खिलाफ भी कार्रवाई की जा रही है। पुलिस का कहना है कि साइबर अपराधियों तक संसाधन पहुंचाने वाले ऐसे नेटवर्क पर आगे भी सख्त कार्रवाई जारी रहेगी।
