दुर्ग पुलिस की अपील पर पलटा अदालत का फैसला, अवैध शराब परिवहन के दो आरोपियों को 2-2 साल की जेल

पहले निचली अदालत ने किया था दोषमुक्त, सत्र न्यायालय ने साक्ष्यों और रासायनिक जांच रिपोर्ट के आधार पर सुनाई सजा; दोनों पर 25-25 हजार रुपये का जुर्माना, वाहन राजसात की कार्रवाई भी जारी रहेगी।

दुर्ग पुलिस की अपील पर पलटा अदालत का फैसला, अवैध शराब परिवहन के दो आरोपियों को 2-2 साल की जेल

दुर्ग। अवैध शराब के परिवहन के मामले में न्यायिक प्रक्रिया के दौरान एक महत्वपूर्ण फैसला सामने आया है। दुर्ग पुलिस की ओर से प्रस्तुत अपील पर सुनवाई करते हुए सत्र न्यायालय दुर्ग ने निचली अदालत के दोषमुक्ति आदेश को निरस्त कर दिया। न्यायालय ने मामले में आरोपी लखन भैंसा उर्फ जोहरी भैंसा और श्रीमती ममता धमगाये को छत्तीसगढ़ आबकारी अधिनियम 1915 की धारा 34(2) के तहत दोषसिद्ध ठहराते हुए दोनों को 2-2 वर्ष के सश्रम कारावास की सजा सुनाई है। इसके साथ ही प्रत्येक आरोपी पर 25-25 हजार रुपये का अर्थदंड भी लगाया गया है।

पुलिस से मिली जानकारी के अनुसार, दोनों आरोपियों के विरुद्ध अवैध शराब परिवहन के मामले में आबकारी अधिनियम के तहत अपराध दर्ज किया गया था। विवेचना के दौरान पुलिस और संबंधित विभाग द्वारा शराब की जप्ती, परिवहन में प्रयुक्त वाहन, शराब के नमूने, स्वतंत्र साक्षियों के कथन तथा रासायनिक परीक्षण रिपोर्ट सहित आवश्यक साक्ष्य एकत्रित किए गए थे। इसके बाद प्रकरण न्यायालय में प्रस्तुत किया गया।

निचली अदालत ने कर दिया था दोषमुक्त

मामले की सुनवाई के बाद न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी, दुर्ग ने 31 जुलाई 2025 को दोनों आरोपियों को दोषमुक्त कर दिया था। निचली अदालत के इस फैसले को चुनौती देते हुए राज्य की ओर से आपराधिक अपील क्रमांक 05/2026 प्रस्तुत की गई। अपील में उपलब्ध साक्ष्यों और विवेचना के दौरान सामने आए तथ्यों के आधार पर दोषमुक्ति आदेश पर पुनर्विचार करने का आग्रह किया गया।

साक्ष्यों और रासायनिक जांच रिपोर्ट का हुआ परीक्षण

अपील की सुनवाई के दौरान सत्र न्यायालय दुर्ग ने प्रकरण के विभिन्न पहलुओं का विस्तृत परीक्षण किया। इसमें शराब की जप्ती की कार्रवाई, परिवहन में इस्तेमाल वाहन, शराब के नमूनों और रासायनिक परीक्षण रिपोर्ट सहित विवेचना में संकलित अन्य साक्ष्यों का अवलोकन किया गया। उपलब्ध अभिलेखों और साक्ष्यों के आधार पर न्यायालय ने निचली अदालत के दोषमुक्ति आदेश को निरस्त कर दिया।

माननीय सत्र न्यायालय दुर्ग ने 23 अक्टूबर 2026 को अपना निर्णय सुनाते हुए दोनों आरोपियों को छत्तीसगढ़ आबकारी अधिनियम, 1915 की धारा 34(2) के तहत दोषसिद्ध घोषित किया।

दोनों आरोपियों को 2-2 साल का सश्रम कारावास

न्यायालय ने आरोपी लखन भैंसा उर्फ जोहरी भैंसा और श्रीमती ममता धमगाये को दो-दो वर्ष के सश्रम कारावास तथा 25-25 हजार रुपये के अर्थदंड से दंडित किया है। अर्थदंड की राशि जमा नहीं करने की स्थिति में प्रत्येक आरोपी को छह-छह माह का अतिरिक्त सश्रम कारावास भुगतना होगा। इसके अलावा आरोपियों द्वारा पूर्व में जेल में बिताई गई अवधि का लाभ नियमानुसार दिए जाने का प्रावधान भी किया गया है।

शराब परिवहन में इस्तेमाल वाहन के राजसात की कार्रवाई जारी

इस मामले में अवैध शराब के परिवहन के लिए इस्तेमाल किए गए वाहन क्रमांक CG-08-AU-0756 को भी जप्त किया गया था। न्यायालय ने वाहन के राजसात की कार्यवाही जारी रखने के निर्देश दिए हैं। इससे प्रकरण में केवल आरोपियों को सजा ही नहीं मिली, बल्कि अवैध शराब परिवहन में इस्तेमाल वाहन पर भी कार्रवाई का रास्ता खुला रखा गया है।

ये हैं दोषसिद्ध आरोपी

  1. लखन भैंसा उर्फ जोहरी भैंसा, उम्र लगभग 38 वर्ष, निवासी बेडगांव, जिला गढ़चिरौली, महाराष्ट्र।

  2. श्रीमती ममता धमगाये, उम्र लगभग 47 वर्ष, निवासी कोरची, जिला गढ़चिरौली, महाराष्ट्र।

दुर्ग पुलिस की अपील पर निचली अदालत के फैसले में हुए इस बदलाव को अवैध शराब परिवहन के मामलों में न्यायिक प्रक्रिया की दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। प्रकरण में प्रस्तुत साक्ष्यों और रासायनिक परीक्षण रिपोर्ट के आधार पर अपील न्यायालय ने दोनों आरोपियों को दोषसिद्ध कर सजा सुनाई।