देश राग में शास्त्रीय नृत्य की छटा, देशभर के कलाकारों ने बिखेरा हुनर

नृत्यधाम कला समिति का 21वें ऑल इंडिया फेस्टिवल एंड कॉम्पिटिशन ऑफ आर्ट एंड कल्चर का आयोजन, 1 नवंबर को मिलेगा जयापद्मा सम्मान

देश राग में शास्त्रीय नृत्य की छटा, देशभर के कलाकारों ने बिखेरा हुनर

भिलाई। बीएनएस स्कूल, सेक्टर-4 में नृत्यधाम कला समिति द्वारा आयोजित 21वें ऑल इंडिया फेस्टिवल एंड कॉम्पिटिशन ऑफ आर्ट एंड कल्चर में भारतीय शास्त्रीय नृत्य की विविध विधाओं का मनमोहक संगम देखने को मिल रहा है। नौ दिनों तक चलने वाले इस कला महोत्सव में विभिन्न शहरों से पहुंचे कलाकार अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन कर रहे हैं। सोमवार को रायगढ़, बिलासपुर और नागपुर के कलाकारों ने शानदार प्रस्तुतियां देकर दर्शकों का ध्यान आकर्षित किया। महोत्सव में कुचिपुड़ी, भरतनाट्यम, कथक और मोहिनी अट्टम जैसी शास्त्रीय नृत्य शैलियों की प्रस्तुतियों ने भारतीय कला और संस्कृति की समृद्ध परंपरा को मंच पर जीवंत किया। कलाकारों ने अपनी भाव-भंगिमाओं, लय, ताल और नृत्य कौशल के माध्यम से प्रस्तुतियों को आकर्षक बनाया। शास्त्रीय नृत्य की अलग-अलग शैलियों को एक ही मंच पर देखने का अवसर प्रतिभागियों और कला प्रेमियों के लिए विशेष रहा।

शास्त्रीय नृत्य की विविध विधाओं का संगम

कार्यक्रम का उद्देश्य शास्त्रीय नृत्य, संगीत और भारतीय सांस्कृतिक विरासत को प्रोत्साहित करने के साथ कलाकारों को अपनी प्रतिभा प्रदर्शित करने का अवसर प्रदान करना है। प्रतियोगिता में प्रतिभागियों ने अपनी साधना, अनुशासन और कलात्मक अभिव्यक्ति के जरिए अपनी क्षमता का परिचय दिया। कुचिपुड़ी, भरतनाट्यम, कथक और मोहिनी अट्टम की उत्कृष्ट प्रस्तुतियों ने आयोजन को सांस्कृतिक रंगों से सराबोर कर दिया।

1 नवंबर को होगा जयापद्मा सम्मान समारोह

नौ दिवसीय प्रतियोगिता के दौरान उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले प्रतिभागियों में से सर्वश्रेष्ठ कलाकारों का चयन किया जाएगा। आयोजकों के अनुसार, चयनित प्रतिभागियों को 1 नवंबर को जयापद्मा सम्मान से सम्मानित किया जाएगा। कुचिपुड़ी, भरतनाट्यम, कथक, मोहिनी अट्टम और तबला विधा में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले कलाकार इस सम्मान के लिए चयनित किए जाएंगे। यह आयोजन कलाकारों को अपनी प्रतिभा निखारने, विभिन्न नृत्य शैलियों से परिचित होने और भारतीय कला-संस्कृति की परंपरा को आगे बढ़ाने का अवसर दे रहा है। भिलाई में आयोजित यह महोत्सव शास्त्रीय नृत्य और संगीत के प्रति लोगों की रुचि बढ़ाने के साथ नई पीढ़ी को सांस्कृतिक विरासत से जोड़ने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल है।