किसानों से महंगी खाद वसूलने का आरोप, पाटन के कृषि सेवा केंद्र संचालक पर केस दर्ज

सरकारी दर से दोगुनी कीमत पर यूरिया और उर्वरक बेचने का आरोप, कृषि विभाग की रेड में लाखों की खाद जब्त

किसानों से महंगी खाद वसूलने का आरोप, पाटन के कृषि सेवा केंद्र संचालक पर केस दर्ज

भिलाई। दुर्ग जिले के पाटन में किसानों को सरकारी निर्धारित दर से अधिक कीमत पर खाद और उर्वरक बेचने के आरोप में कृषि विभाग ने बड़ी कार्रवाई की है। वरिष्ठ उर्वरक निरीक्षक पुष्पा रामटेके की शिकायत पर पाटन थाना पुलिस ने कृषि सेवा केंद्र के संचालक रूपेश कश्यप के खिलाफ आवश्यक वस्तु अधिनियम, 1955 की धारा 3 और 7 के तहत अपराध दर्ज किया है। जांच में अधिक कीमत पर उर्वरक बेचने, स्टॉक में गड़बड़ी और नियमों के उल्लंघन के आरोप सामने आए हैं।

कृषि विभाग के अनुसार, 15 जून को उप संचालक कृषि, दुर्ग के निर्देश पर जिला स्तरीय जांच दल ने पाटन स्थित मेसर्स कृषि सेवा केंद्र में छापेमारी की। जांच दल में एडिशनल डायरेक्टर कृषि सुमन कोर्राम, कृषि विकास अधिकारी नवीन खोब्रागड़े, मुकेश मढ़ेरिया, ग्रामीण कृषि विस्तार अधिकारी सुनील सिगौंर तथा कार्यालयीन कर्मचारी रौनक सिन्हा शामिल थे।

जांच के दौरान रौनक सिन्हा को सामान्य ग्राहक बनाकर दुकान में भेजा गया। उन्होंने यूरिया और 20:20:0:13 उर्वरक की उपलब्धता और कीमत पूछी। आरोप है कि दुकानदार ने यूरिया का मूल्य 500 रुपये प्रति बैग तथा 20:20:0:13 उर्वरक का मूल्य 2,000 रुपये प्रति बैग बताया। इसके बाद दो बैग यूरिया और दो बैग उर्वरक खरीदने पर फोनपे के माध्यम से 5,000 रुपये का भुगतान किया गया। बिल मांगने पर दुकानदार ने मोबाइल पर बिल भेजने की बात कही।

कृषि विभाग का आरोप है कि दुकान में निर्धारित मूल्य सूची और उपलब्ध स्टॉक का प्रदर्शन नहीं किया गया था तथा निर्धारित प्रारूप में कैश मेमो भी जारी नहीं किया गया। अनियमितताएं मिलने पर विभाग ने कारण बताओ नोटिस जारी करते हुए एनएफएल कंपनी की 10.08 टन यूरिया और 20:20:0:13 उर्वरक की 2.25 टन खेप जब्त कर ली।

बिल में कम राशि, भुगतान ज्यादा

जांच में अधिकारियों ने पाया कि पीओएस मशीन से जारी बिल में कुल राशि 3,562 रुपये दर्ज थी, जबकि ग्राहक से फोनपे के जरिए 5,000 रुपये वसूले गए। अधिकारियों के मुताबिक यह अंतर नियमों के विपरीत है।

शिकायत में यह भी उल्लेख किया गया है कि खरीदार के रूप में रौनक सिन्हा का पता ग्राम कलंगपुर, तहसील गुंडरदेही, जिला बालोद दर्ज किया गया था। इसके बावजूद जिले से बाहर के किसान को उर्वरक बेचा गया, जो निर्धारित नियमों के विरुद्ध बताया गया है।

सरकारी दर से कई गुना अधिक वसूली का आरोप

जांच के अनुसार, यूरिया का सरकारी विक्रय मूल्य 266 रुपये प्रति बैग है, जबकि आरोपी विक्रेता 500 रुपये प्रति बैग वसूल रहा था। इसी तरह 20:20:0:13 उर्वरक का निर्धारित मूल्य 1,500 रुपये प्रति बैग होने के बावजूद 2,000 रुपये प्रति बैग लिया जा रहा था।

स्टॉक सत्यापन के दौरान भी बड़ी गड़बड़ी सामने आई। अधिकारियों के मुताबिक पीओएस रिकॉर्ड में 20:20:0:13 उर्वरक के 67 बैग दर्ज थे, जबकि मौके पर केवल 45 बैग मिले। यानी रिकॉर्ड और वास्तविक स्टॉक में 22 बैग का अंतर पाया गया।

कृषि विभाग की शिकायत पर पाटन थाना पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। अब यह पता लगाया जा रहा है कि नियमों के उल्लंघन और अधिक कीमत पर उर्वरक बिक्री के मामले में और कौन-कौन जिम्मेदार है।