देश राग में कोलकाता और चेन्नई के कलाकारों ने भरतनाट्यम, कुचिपुड़ी और गौड़ीय नृत्य से बांधा समां






भिलाई। कला, संस्कृति और संगीत की विविध छटाओं से सराबोर भिलाई के एसएनजी सेक्टर-4 में आयोजित 21वें ऑल इंडिया फेस्टिवल एंड कॉम्पिटिशन ऑफ आर्ट एंड कल्चर 'देश राग' में इन दिनों भारतीय सांस्कृतिक विरासत का अद्भुत संगम देखने को मिल रहा है। देश के अलग-अलग राज्यों से पहुंचे कलाकार अपनी कला और प्रतिभा के जरिए मंच पर भारतीय परंपराओं की जीवंत तस्वीर पेश कर रहे हैं। शास्त्रीय नृत्य की भावपूर्ण मुद्राएं हों या लोकनृत्य की जीवंतता, बॉलीवुड की रंगीन प्रस्तुतियां हों या संगीत की मधुर स्वर लहरियां, हर प्रस्तुति दर्शकों को कला और संस्कृति की एक नई दुनिया से रूबरू करा रही है। फेस्टिवल के दौरान कोलकाता और चेन्नई से पहुंचे अतिथि कलाकारों की विशेष प्रस्तुतियां आकर्षण का केंद्र रहीं। कलाकारों ने अपनी साधना, अनुशासन और शानदार मंचीय अभिव्यक्ति से दर्शकों का दिल जीत लिया। कोलकाता के अतनु दास ने भरतनाट्यम, कौशिक शॉ ने गौड़ीय नृत्य, सृष्टि मलिक और ध्रुबज्योति सरकार ने भरतनाट्यम तथा तीर्थंकर गुप्ता ने कुचिपुड़ी नृत्य की मनमोहक प्रस्तुति दी। वहीं चेन्नई की शैली मोगरी ने भरतनाट्यम के माध्यम से भारतीय शास्त्रीय नृत्य की समृद्ध परंपरा और उसकी भावपूर्ण अभिव्यक्ति को मंच पर साकार किया।
कलाकारों की प्रस्तुतियों में नृत्य की बारीक मुद्राओं, चेहरे के भाव, लय और ताल का सुंदर समन्वय देखने को मिला। हर कलाकार ने अपनी विशिष्ट शैली से मंच पर अलग छाप छोड़ी। शास्त्रीय नृत्य की पारंपरिक मुद्राओं और भाव-भंगिमाओं ने जहां दर्शकों को भारतीय संस्कृति की गहराई से परिचित कराया, वहीं कलाकारों की सधी हुई पदचाप और संगीत के साथ उनका तालमेल आकर्षण का केंद्र बना रहा। प्रस्तुतियों के दौरान सभागार में मौजूद दर्शक लगातार तालियां बजाकर कलाकारों का उत्साहवर्धन करते रहे। कई प्रस्तुतियों के बाद पूरा परिसर तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठा।
एक मंच पर दिख रही भारतीय नृत्य परंपराओं की विविधता
देश राग फेस्टिवल की खासियत यह है कि यहां देश के विभिन्न हिस्सों की कला और सांस्कृतिक परंपराओं को एक ही मंच पर देखने का अवसर मिल रहा है। आयोजन में कुचिपुड़ी, भरतनाट्यम, कथक और मोहिनीअट्टम जैसी प्रमुख शास्त्रीय नृत्य शैलियों के साथ मणिपुरी नृत्य, अर्धशास्त्रीय नृत्य, लोकनृत्य और बॉलीवुड शैली की प्रस्तुतियां भी शामिल हैं। अलग-अलग नृत्य विधाओं के जरिए कलाकार अपने क्षेत्र की सांस्कृतिक पहचान और परंपराओं को दर्शकों तक पहुंचा रहे हैं। भारतीय शास्त्रीय नृत्य केवल मनोरंजन का माध्यम नहीं, बल्कि भाव, भक्ति, अनुशासन और अभिव्यक्ति की समृद्ध परंपरा है। प्रत्येक नृत्य शैली की अपनी अलग पहचान, वेशभूषा, संगीत, मुद्राएं और प्रस्तुति की विशिष्टता होती है। कलाकार अपनी आंखों के भाव, हाथों की मुद्राओं, शारीरिक संचालन और पदचाप के माध्यम से विभिन्न भावों और प्रसंगों को जीवंत कर देते हैं। यही वजह है कि इन प्रस्तुतियों को देखते समय दर्शक केवल नृत्य का आनंद ही नहीं लेते, बल्कि उससे जुड़ी सांस्कृतिक विरासत को भी महसूस करते हैं।
नई पीढ़ी को कला और संस्कृति से जोड़ने की पहल
इस तरह के आयोजन कला के संरक्षण और संवर्धन के साथ नई पीढ़ी को भारतीय सांस्कृतिक विरासत से जोड़ने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। विभिन्न राज्यों से आए प्रतिभागियों को अपनी प्रतिभा दिखाने का अवसर मिल रहा है। वहीं दर्शकों को देश की अलग-अलग नृत्य परंपराओं, संगीत और सांस्कृतिक विविधताओं को करीब से जानने का मौका मिल रहा है। देश राग का मंच अनुभवी कलाकारों के साथ उभरती प्रतिभाओं के लिए भी अपनी कला प्रदर्शित करने का माध्यम बना हुआ है। पारंपरिक शास्त्रीय प्रस्तुतियों के साथ आधुनिक नृत्य शैलियों का समावेश आयोजन को और भी आकर्षक बना रहा है। यहां कला की कोई एक सीमा नहीं दिखाई देती, बल्कि अलग-अलग भाषाओं, क्षेत्रों और परंपराओं के कलाकार अपनी प्रस्तुतियों के जरिए सांस्कृतिक एकता का संदेश दे रहे हैं।